मैं और कावेरी – Part 2

Click here to read first part to know how I reached to Mysore. http://www.naveenchoudhary.com/mylife/cauvery-issue/ ————————————————————————————————————————————— Part 2 सुबह उठा तो एयरफोर्स का ट्रक खड़ा था. पता चला कि डारमेट्री में सोयी 70% जनता इसी इंटरव्यू के लिए आई है. वही लड़का

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मैं और कावेरी – Part 1

कहते हैं न कि ‘जहाँ पैर पड़े संतन के, वहीँ बंटा-धार”. मेरा और बैंगलोर का ऐसा ही रिश्ता है. जब भी यहाँ आया तब या तो शहर में कांड हुआ या मेरी लाइफ में. हाँ इन दोनों तरह के कांड

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खोटे सिक्के जो चल गए..

खोटे सिक्के जो चल गए..    आज सुबह सुबह एक बहुत पुराने अजीज दोस्त रोबिन को फ़ोन किया उसके जन्मदिन की शुभकामना देने को| बहुत समय के बाद बात हुई उससे| पुष्पा मेरे अधिकतर दोस्तों को जानती है उनके नाम से, पर उसने रोबिन का नाम नहीं सुना था क्योकि मैंने कभी जिक्र ही ही नहीं किया| उसने जब पुछा की ये कौन थे, तो मुझे आश्चर्य हुआ की पता नहीं क्यों मैंने कभी जिक्र नहीं किया रोबिन का|

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पहला चुनाव और जातिवाद से परिचय

पहला चुनाव और जातिवाद से परिचय    पिछला भाग “छात्र राजनीती से परिचय” पढ़ने के लिए क्लिक करे – http://www.naveenchoudhary.com/mylife/student-politics/entry-to-politics.html अब आगे: अगले दिन हम चाय पीने कैंटीन पहुचे| राजेंद्र तिवारी वहाँ बैठा हुआ था|  उसने हमें देखते ही हाथ हिलाया और अपनी टेबल पर आने को इशारा किया| उसे देखते ही

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STD वाला प्यार

STD वाला प्यार   कभी कभी लगता है की उपरवाले ने मेरी किस्मत में STD वाला प्यार ही लिखा हुआ है| मेरा इतिहास ही कुछ ऐसा है| लोकल में तो प्यार हो ही नहीं पाता| बहुत समय पहले जब मैं यूनिवर्सिटी में

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छात्र राजनीती से पहला परिचय

छात्र राजनीती से पहला परिचय   कॉलेज में नए थे| मन में जोश था, अपनी पहचान बनाने की इच्छा थी| पढने में तो अच्छा था ही नहीं मै, तो पहचान कैसे बनायीं जाये इस पर मंथन शुरू हुआ | वैसे भी पढने वालो को जानता ही कौन है, पूरे कॉलेज को नहीं पता की इस

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तीस मार खां

तीस मार खां कॉलेज में थे तो हम लोग नए लेकिन मैं फर्स्ट इयर में ही अपने कॉलेज से एम्.पी. का चुनाव जीत चुका था और साथ में ही एक ग्रुप में रहने की वजह से भी लोग हमें जानने

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एक अधूरी प्रेम कहानी…

एक अधूरी प्रेम कहानी… परसों बहुत सालो के बाद एक बार फिर मैंने तुम्हे इतने करीब से देखा. तुम्हारे लिए जो दबा हुआ प्यार था, एक बार फिर जग गया| पिछले 3 दिन जो तुम्हारे पास गुजारे उन्होंने फिर से

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जेल में वो 36 घंटे

जेल में वो 36 घंटे   पिछले भाग “जेल यात्रा” में आपने पढ़ा की हम कैसे जेल पहुचे.. अब आगे.. फोन करने के बाद हम सबको एक बहुत बड़े से दरवाजे में बने हुए छोटे से दरवाजे से अंदर भेज

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जेल यात्रा

जेल यात्रा   जून का महीना. सुबह 7.30 का समय. फोन की घंटी बजी और कुछ सेकंड के बाद पापा की आवाज़ आई “नवीन, तुम्हारा फोन”. फोन उठाया तो छात्र संगठन के जयपुर प्रभारी दूसरी तरफ थे. बोले – नवीन जी,

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