कन्हैया कुमार, तुम कॉन्डोम न हो जाना

कन्हैया कुमार,  तुम कॉन्डोम न हो जाना   प्यारे कामरेड कन्हैया, ये कोई ओपन लेटर टाइप नहीं है, पर वैसा सा ही समझ लो. तुम तक पहुंचे न पहुंचे, पर सोचे लिख लेते हैं. देखो, यूँ तो हम कोशिश करेंगे

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पहला चुनाव और जातिवाद से परिचय

पहला चुनाव और जातिवाद से परिचय    पिछला भाग “छात्र राजनीती से परिचय” पढ़ने के लिए क्लिक करे – http://www.naveenchoudhary.com/mylife/student-politics/entry-to-politics.html अब आगे: अगले दिन हम चाय पीने कैंटीन पहुचे| राजेंद्र तिवारी वहाँ बैठा हुआ था|  उसने हमें देखते ही हाथ हिलाया और अपनी टेबल पर आने को इशारा किया| उसे देखते ही

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जेल यात्रा

जेल यात्रा   जून का महीना. सुबह 7.30 का समय. फोन की घंटी बजी और कुछ सेकंड के बाद पापा की आवाज़ आई “नवीन, तुम्हारा फोन”. फोन उठाया तो छात्र संगठन के जयपुर प्रभारी दूसरी तरफ थे. बोले – नवीन जी,

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