मेट्रो से उतरा तो स्टेशन के बाहर के खोमचे पर एक लड़की खड़ी कुछ खरीद रही थी. जितना कुछ फेसबुक से सीखा उससे समझ गया संस्कारी लड़की है क्योंकि उसने सलवार सूट पहना था. बहुत ही ज्यादा भारतीय थी क्योंकि दोनों हाथों में मेहंदी भी लगी हुई थी. मैं उसके संस्कारों की तारीफ मन ही मन कर रहा था कि देखता हूँ दुकानदार ने उस लड़की को सिगरेट का पूरा पैकेट पकड़ा दिया. जो लड़की अब तक संस्कारी थी अचानक चरित्रहीन वाली केटेगरी में जाती दिखी पर उसके कपड़े अभी भी उसके संस्कारी होने की गवाही दे रहे थे. मैं उधेड़बुन में था कि वो लड़की निकल गयी और दूसरी आ गयी. ये वाली जीन्स और टी-शर्ट पहने थी और इस तरह चरित्रहीन वाली केटेगरी के लिए क्वालीफाई कर रही थी. मैं इंतजार करने लगा कि जैसे ही ये सिगरेट लेगी मैं इसकी फोटो खींच कर फेसबुक पर डाल दूंगा ताकि जरूरत पड़ने पर हम उसे चरित्रहीन घोषित कर सकें पर इस लड़की ने भी धोखा दिया. इसने उस खोमचे वाले से सिगरेट नहीं टॉफ़ी खरीदी और मैं एक बार फिर कंफ्यूज हो गया.

characterless girl
चरित्रहीन लड़की

एक सूट वाली लड़की सिगरेट खरीदती है और जीन्स वाली टॉफ़ी. अगर ऐसे चलता रहा तो हमारे बेसिक्स का क्या होगा. फेसबुक से, अपने नेताओं से और अपने आसपास के समाज से मैंने जो सीखा उस हिसाब से लड़की तीन प्रकार से चरित्रहीन होती है:

  1. सिगरेट या शराब का सेवन करने से
  2. जीन्स, स्कर्ट, स्लीवलेस टॉप वगैरह पहनने से
  3. रात के 8-9 बजे बाद सड़क पर रहने से

हालाँकि फेसबुक से ये भी समझा हूँ कि यही 3 काम करने से लड़का चरित्रहीन नहीं ‘कूल ड्यूड’ बन जाता है. अगर ऐसा नहीं होता तो फेसबुक पर अब तक ये भी पूछा गया होता कि विकास बराला रात को 12:30 बजे बाहर क्यों था वो भी शराब पीकर.

मैं और कुछ साथी एक पेज चलाते हैं – ‘कटाक्ष’. परसों उस पर मैंने लिखा था – “मोदी जी ने कहा था ‘विकास’ आएगा पर लड़कियों का पीछा भी करेगा ये नहीं बताया था।”  दरअसल मैं शुरू में नासमझ था तो एक कटाक्ष लिख दिया पर फेसबुक पर लोगों के कमेंट ने इतना कुछ सिखाया कि मैं बता नहीं सकता. अब नीचे उसमें से कुछ उदहारण देखिये.

एक ने कहा – “क्या तुम भूल गए रोहतक की बहनों और जसलीन कौर को?” अरे सर, मैं नहीं भूला और सिर्फ उनको क्यों, मैं तो ऐसी लड़कियों को भी जानता हूँ जिन्होंने झूठे दहेज़ के मुक़दमे करके लड़कों की जिंदगियां बर्बाद कर दी. ऐसी भी घटनाएँ हैं जहाँ झूठे सेक्सुअल हरासमेंट के मुक़दमे दायर किये गए. आप 2 की कहते हैं, मैं तो सैकड़ों केस पढ़ चुका हूँ जहाँ महिलाओं ने कानून का इस्तेमाल पुरुषों को फंसाने को किया पर क्या इसलिए मैं हर लड़की को झूठा मान लूँ बिना किसी जांच के? और इस बार खासकर के क्योंकि इस बार इल्जाम हमारी भारतीय पार्टी के नेता के बेटे है? रोहतक वाली लड़कियों का चरित्र हनन तो किसी ने नहीं किया क्योंकि उन लड़कियों ने जिस लड़के पर झूठा इल्जाम लगाया वो एक खास पार्टी से संबध नहीं था पर वर्णिका के मामले को झूठा साबित करना जरूरी है क्योंकि…. आगे लिखूं या समझ गए? जितने लोग किसी भी लॉ कॉलेज के आगे से भी जिंदगी में कभी गुजरे उन सबने फैसला सुनाया कि वर्णिका वही रोहतक वाली लड़की या दिल्ली की जसलीन है. खैर इससे मैंने ये सीखा कि इतिहास को याद रखना जरूरी है और बाद में मौका पड़ने पर इतिहास की किताबों में उसका नाम बदलना आना चाहिए. सरकार भी यही तो कर रही है.

Vikas Barala

Varnika kundu case

एक ने कहा कि रोड रेज का मसला था और लड़कों को तो पता भी नहीं कि उस कार में लड़की थी. उसे यूँ ही अपहरण का मामला बना दिया. (पूरा कमेंट पढ़ें स्क्रीनशॉट में). अब मुझे नहीं पता कि महाभारत के संजय इन्हें अपनी दिव्य दृष्टि दे गए या ये खुद उस कार में थे पर ये पक्का है कि ये साहब भी कभी न कभी लॉ कॉलेज के सामने से तो गुजरे थे. मैंने पूछना चाहा कि रोडरेज भी अगर था और गाड़ी में लड़की की जगह लड़का होता तो क्या ये लड़के गाड़ी रोक उसे उतारते और फूलों का गुलदस्ता देकर कहते – “गलती से मिस्टेक हो गया रे मामू. आई एम् सॉरी, चल जाने दे.” इस कमेंट से मैंने सीखा कि अगर कल को रोड रेज में आप फंसे तो पुलिस को फ़ोन न करें और गुलदस्ते का इंतज़ार करें.

Chandigarh case

एक ने लड़की की शराब के शॉट्स के साथ की फोटो पोस्ट कर दी और कहा कि देर रात तक घूमने वाली ये शरीफ लड़की विकास बराला को शराबी कहती है और खुद तो जैसे छूती ही नहीं. एक उसे हरामजादी लिखना चाहता था पर संस्कारी था तो उसने पूछ डाला कि ये शरीफजादी रात 1 बजे कौन सी सब्जी लेने निकली थी. मेडिकल करा लेते लड़की का. लड़का जानता था कि जब रात 1 बजे तक बाहर घूमने वाला लड़का हरामजादा ऊप्स शरीफजादा है तो लड़की को क्या कहा जाये. खैर, इस मामले से मुझ नहीं शराब की कंपनियों को सीखना चाहिए. उन्हें शराब की बोतलों पर “शराब पीना स्वास्थय के लिए हानिकारक है” वाली चेतावनी के साथ एक और चेतावनी लिखनी चाहिए – “ये शराब पीना आपके चरित्र के के लिए हानिकारक है”. लड़कियां वही बोतल उठाये जिस पर चरित्र वाली चेतावनी न हो और वक़्त पड़ने पर उस बोतल को दिखा सकें.

Subhash Barala vikas barala

कुछ लोगों ने जिनमें एक महिला नेत्री भी थी, उन्होंने लड़की के कुछ पुरुष दोस्तों के साथ की उसकी पुरानी फोटो पोस्ट कर के ये लिख दिया कि लड़की खुद विकास बराला के साथ घूमती थी. हालाँकि कोई अँधा भी बता पायेगा कि दोनों तस्वीरों में लड़के अलग है और कोई मानसिक विक्षिप्त भी बता पायेगा कि अगर लड़के उसके दोस्त थे (और खुद विकास भी) तो भी कौन उसे हक़ देता है कि वो लड़की का पीछा करे और उसे रोकने की कोशिश करे. यह तस्वीर एक बिज़नस का मौका दिखाती है. हमारे देश में लोगों की आँखें काफी कमजोर है(और दिमाग भी). उनका इलाज करने के लिए फेसबुक पर eye-clinic खुलने चाहिए. खैर, मैंने यहाँ ये सीखा कि अगर कोई लड़की अपने किसी पुरुष मित्र के साथ करीब होकर तस्वीर खिचवाये तो वो चरित्रहीन तो है ही और उसे अपने अपने खिलाफ होने वाले अपराध की शिकायत का हक़ नहीं.  

एक ने तो ये भी कहा कि तुम लोग बीजेपी के पीछे पड़े हो. अगर लड़का बीजेपी नेता का बेटा न होता तो तुम लोग लड़की को सपोर्ट न करते. मेरे कटाक्ष पेज के ही एडमिन ने उसका जवाब दिया कि तुम लोग भी उस लड़के का साथ न देते अगर लड़का बीजेपी नेता का बेटा न होता. वैसे हकीकत तो यही है कि अगर लड़का बीजेपी नेता का बेटा न होता तो धाराएँ भी न बदली जाती. इनके तर्क देख कर मुझे लगता है अगर निर्भया केस भाजपा के शासन काल में होते तो इन जैसे लोग उस रेप को भी सही ठहराने लगते. खैर, मैंने यहाँ ये सीखा कि अगर कोई भाजपा नेता या उसका रिश्तेदार ऐसे किसी अपराध में शामिल है तो हमें उसे गाली देने की बजाय ‘राष्ट्र-हित’ में उसे निर्दोष मान कर उसका साथ देना चाहिए.

सबसे आखिरी – इन महाशय ने कुछ समय पहले बुर्के वाली महिला की तस्वीर पोस्ट करके मुस्लिम समुदाय को महिलाओं पर अत्याचार करने वाला बताया और महिलाओं की कपड़ो को पहनने की आज़ादी की मांग उठाई. अब इस मामले में लड़की ने उनकी अंधभक्ति वाली पार्टी के नेता के बेटे पर आरोप लगा दिया तो उन्होंने लड़की की स्लीवलेस ड्रेस वाली फोटो पोस्ट करके कहा – “इसके कपडे तो देखो.” मैंने सीखा कि सिर्फ लड़की के कपड़ों से नहीं बल्कि उसे छेड़ने य बलात्कार करने वाला किस पार्टी का है उस आधार पर लड़की चरित्र तय करो.  

मैं भी ना, कहाँ से कहाँ चला जाता हूँ.… बात सड़क पर मिली दो लड़कियों की कर रहा था और विकास वर्णिका में उलझ गया. हाँ तो बात यूँ थी कि इन दोनों लड़कियों ने पॉइंट नंबर 1 और 2 को उल्टा पुल्टा कर दिया था और समय दिन का था इसलिए मैं इनके चरित्र को लेकर पूरी तरह कंफ्यूज था. अब एक ही रास्ता बचा था कि मैं उने दोनों लड़कियों का पीछा करूँ और देखूं कि रात कितने बजे तक बाहर रहती है और शराब पीती है या नहीं. मेरे पास गाड़ी नहीं थी तो मैं पीछा नहीं कर पाया. फिर कभी मौका मिला तो जरूर पीछा करूँगा और उन लड़कियों का करैक्टर सर्टिफिकेट निकाल कर दूंगा.

Concluding note: मैं नहीं जानता कि वर्णिका सच्ची है या नहीं. मैं नहीं जानता कि आगे क्या होगा इस मामले में. मैं न उसे समर्थन दे रहा हूँ न विकास को. मैंने ये पोस्ट वर्णिका के समर्थन या विकास के विरोध के लिए नहीं लिखी. मैंने ये पोस्ट आपके और मेरे जैसों के लिए लिखी है जो गलत तर्कों के सहारे एक नेता के बेटे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. नेताओं के बेटों को तो कानून तोड़ने का अधिकार मिला हुआ है और वो करते रहेंगे ही. वर्णिका भी ताकतवर थी, मामला उठा गयी. आप और मुझ जैसे कमजोर लोगों का क्या? हम क्या करेंगे ऐसी स्थिति में? मैं सिर्फ इतना जानता हूँ कि अगर मामला रिपोर्ट हुआ है तो हम आप तथ्यों पर तर्क करें, सोशल मीडिया जैसे हथियार को पुलिस और राजनीतिज्ञ पर ये दबाव बनाने को इस्तेमाल करें की जांच निष्पक्ष हो. किसी का साथ देना है तो उस आधार पर दें. लड़की के चरित्र पर ऊँगली उठा कर आप इस मामले को उस दिशा में ले जा रहे हैं जिस दिशा में ये है ही नहीं. आप उन सब अपराधियों को बता रहे हैं कि तुम अपराध करो महिलाओं के खिलाफ और फिर चरित्र हनन का हथियार उठा लो. यकीन मानिये कोई भी अपराधी ये हथियार कभी भी आपके घर की महिलाओं के खिलाफ भी उठा सकता है और बाकि लोग नारे लगायेंगे – “नेता के बेटे तुम अपराध करो, हम तुम्हारे साथ हैं.” अगर आप भी यही करते रहे तो आप में और बलवंत राय के कुत्तों में सिर्फ 2 टांगों का फर्क रह जायेगा.

जय हिन्द.

संस्कारी लड़की – शराब, ड्रेस और देर रात

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