कड़ी निंदा महात्म्य

 

निंदा कई प्रकार की होती है जैसे कि चुगली, पर-निंदा, ईश-निंदा, परन्तु इन सबसे घातक है ‘कड़ी निंदा.’ पिछले कुछ सालों में ये एक ट्रेंडिंग विषय रहा हैं हालाँकि इसकी पहुँच अभी भी आम आदमी तक नहीं हुई है, ये सिर्फ राजनेताओं तक सीमित है.

बहुत से लोग मानते हैं कि कड़ी निंदा नामक घातक हथियार की खोज देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने की थी जोकि सत्य भी है पर पूरी तरह नहीं. इस घातक हथियार का वर्णन महाभारत काल में हुआ था जो वेदव्यास लिखना भूल गए. मैं बताता हूँ –

कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा – हे प्रभु, क्या इतना बड़ा युद्ध करना आवश्यक हैं? क्या हम कौरवों की कड़ी निंदा करके उन्हें नहीं मार सकते?

कृष्ण बोले – हे पार्थ, लड़ाई के मैदान के बीच में मैंने रथ रोक कर कर्म के ऊपर इतना सिखाया फिर भी तुम शोर्ट कट से युद्ध जीतना चाहते हो? याद रखो ये धर्मयुद्ध है और तुम्हें लड़कर ही जीतना है.

अर्जुन – हे देवकीनंदन, आपकी आज्ञा शिरोधार्य है पर क्या कड़ी निंदा जैसे घातक हथियार का कभी इस्तेमाल न होगा?

कृष्ण – होगा अर्जुन, अवश्य होगा और इसी भारतवर्ष में होगा. वो युग कलियुग होगा और इसके इस्तेमाल करने का हक़ सिर्फ भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली राजाओं के हाथ में होगा.

इस तरह कृष्ण ने त्रेतायुग में कड़ी निंदा की भ्रूण हत्या कर दी. कलियुग आया और भारतवर्ष को कौरवों जैसे एक भाई पाकिस्तान मिला. पाकिस्तान ने कौरवों की तरह छल-कपट करके भारत को तंग करना शुरू किया. ऐसे समय में महाबलिष्ठ और महावाचाल मनमोहन सिंह ने कमान संभाली और पाकिस्तान के ऊपर जबरदस्त हमला करते हुए उसकी ‘कड़ी निंदा’ कर डाली.

चूँकि वेदव्यास कड़ी निंदा की महत्ता लिखना भूल गए थे, इसलिए इतिहास विशेषज्ञ एवं तत्कालीन द्वारका प्रान्त के मुखिया नरेंद्र मोदी ने मनमोहन की कड़ी निंदा की ही निंदा कर डाली. उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में पाकिस्तान को जवाब कृष्ण के सुझाये तरीके से दिया जायेगा न कि कड़ी निंदा से.

समय बदला मोदी भारतवर्ष के प्रमुख बने और उन्होंने तय किया कि जिस तरह मनरेगा जैसी नीति को पिछली सरकार की नाकामी की याद दिलाने को आगे भी चलाते रहेंगे उसी तरह कड़ी निंदा जैसे हथियार को भी ख़तम न किया जायेगा. हालाँकि कई भक्त कहते हैं कि श्री मोदी को थोडा देर से ‘कड़ी निंदा’ के महात्म्य का पता लग गया इसलिए वो कूटनीति के तहत कड़ी निंदा का बेहतरीन इस्तेमाल करके पाकिस्तान की फाड़े हुए हैं.

Modi vs Manmohan

मैंने भी गौर किया तो पाया कि मोदी सरकार ‘कड़ी निंदा’ का बेहतरीन इस्तेमाल कर रही है. अगर आप देखें तो पहले ‘कड़ी निंदा’ के सर्वाधिकार सिर्फ मनमोहन सिंह के पास ही सुरक्षित थे. मोदी सरकार की दूरगामी सोच दिखाते हुए और पाकिस्तान पर अधिक दबाव बनाने के लिए अपनी पाकिस्तान पालिसी में जबरदस्त बदलाव किया और कड़ी निंदा का अधिकार सभी मंत्रियों को दिया. अब सिर्फ मोदी नहीं बल्कि राजनाथ सिंह और मनोहर पारिकर भी ‘कड़ी निंदा’ को बिना अनुमति का इंतजार किये पूरे अधिकार से इस्तेमाल करते हैं. इन सब का असर ये हुआ कि मसूद अजहर को पाकिस्तान गिरफ्तार करके भारत सरकार को देने का फैसला कर चुकी है.

दरअसल देखा जाये तो कड़ी निंदा करना एक कला है जो हर किसी के पास नहीं होती. मनमोहन सिंह के पास इस कला की कमी थी इसलिए उनकी कड़ी निंदा की यत्र तत्र सर्वत्र आलोचना हुई परन्तु मोदी सरकार की कड़ी निंदा में एक गहराई है. जिस तरह कड़ी पत्ता डालने से सब्जी में स्वाद आ जाता है उसी तरह जब राजनाथ जी की दमदार आवाज़ से कड़ी निंदा शब्द निकलता है को कड़ी निंदा का सीना भी फूल कर 56 इंच का हो जाता है.

कड़ी निंदा दिखता साधारण सा है पर इसका इस्तेमाल करना सबके बस की बात नहीं. इसको करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए. अब देखिये मुझे लौकी की सब्जी नहीं पसंद लेकिन आज तक मैं अपनी बीवी के सामने उसकी कड़ी निंदा नहीं कर पाया. कल एक मित्र ने फेसबुक ने पर पोस्ट डाली थी कि “काश! माँ चप्पल की बजाये, कड़ी निंदा कर के छोड़ दिया करती मुझे बचपन में.” अब इन्हें ये नहीं पता कि कड़ी निंदा करने के सिर्फ हिम्मत ही नहीं कठोर ह्रदय भी चाहिए और माँ का दिल मोम का होता है.

कुछ लोग जो मुझसे पहले से कड़ी निंदा महात्म्य को समझ पा रहे थे उन्होंने कल मेरे फेसबुक पोस्ट पर मुझे काफी खदेड़ा मुझे और कहा कि तुम इतने समझदार हो तो तुम्हीं समाधान दे दो. रात भर सोचने के बाद आज मुझे इस पाकिस्तान और आतंक की समस्या का समाधान सूझ गया. गौर से पढियेगा और वो मित्र जिन्हें मोदी जी अपनी सीक्रेट नीतियां बताते हैं उनसे निवेदन है कि मोदी जी जब अगली बार उन्हें कूटनीति एक्सप्लेन करने बुलाएँ तो मेरा सुझाव उन तक पहुंचा दें. तो सुझाव यूँ है –

“देश भर में कड़ी निंदा डेवलपमेंट स्कूल खोले जाये और हर देशवासी को कड़ी निंदा की एक कड़ी ट्रेनिंग दी जाये. जरा सोचिये 125 करोड़ लोग… नहीं नहीं, इसमें से हमें अफज़ल प्रेमी गैंग, सिकुलर, कम्युनिस्ट, दलाल मीडिया को हटाना होगा. तो सोचिये अगर बचे हुए 124.75 करोड़ लोग अगर एक साथ पाकिस्तान की कड़ी निंदा कर देंगे तो पाकिस्तान कड़ी निंदा के ओवरडोज से ही ख़त्म हो जायेगा.”

जी हाँ, चूँकि हम युद्ध नहीं कर सकते, घर में घुस कर मार नहीं सकते इसलिए सबसे कारगर हथियार यही है. उम्मीद है आप भी कड़ी निंदा महात्म्य समझ गए होंगे. अगर अब से कोई कड़ी निंदा की निंदा करता मिले तो आप पूरी कड़ाई से उस निंदा करने वाले की कड़ी निंदा करें.

जय कड़ी निंदा, जय हिन्द.


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कड़ी निंदा महात्म्य

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5 thoughts on “कड़ी निंदा महात्म्य

  1. आशा है कि हमारे नेताओं को गीता का ज्ञान मिले और हम युद्ध कर पाएं वर्ना निंदा करते करते एक दिन हम खुद ही नींद में चले जायेंगे|

  2. Asliyat me kadi nindaa shabd me hi us ka arth bhi nihit he. Kadi Ninda=Kadi Neend aa. Ham par jab bhi hamla hota he ham tabhi “kadi need aa” Ka aahvaahan kar aur bhi Kadi neend me so jaate hen.

  3. हम आपके कड़ी निंदा महात्म के आधार पर कड़ी निंदा करते हैं !

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