मै मुख्यमंत्री बनना चाहता हूँ

(Note: read full article to enjoy the mixed juice.)

तेलंगाना एक और राज्य बनने वाला है. मै समझ नहीं पाता की इन राज्यों के गठन की मांग का आधार कितना तर्कसंगत है. पिछड़ेपन के नाम पर, भाषा के नाम पर अलग राज्य की मांग होती है. भारत में तो कहावत है की “कोस कोस में बदले पानी और 4 कोस में बानी”.  तब तो हमें हर 50-100 कि.मी. पर अलग राज्य बनाने पड़ेंगे. राजस्थान में जयपुर अजमेर कि तरफ अलग भाषा और संस्कृति है, वही जोधपुर पाली, उदयपुर कि भाषा अलग, भरतपुर तो भाषा से उत्तर प्रदेश से मिलता हुआ है, तो क्या राजस्थान के 3 हिस्से कर दे. उत्तर प्रदेश में भी पश्चिमी और पूर्वी प्रदेश में भाषा और संस्कृति का फर्क है. बिहार में मगही, भोजपुरी, और मैथिलि भाषा है. इन सभी जगहों का आर्थिक स्तर भी भिन्न है. अगर इन आधार पर राज्यों का गठन होने लगे तो कम से कम 150 राज्य हिंदुस्तान में बन जायेंगे.

इन सभी आंदोलनों के पीछे वो नेता है जो राज्य स्तर पर अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा नहीं कर पाए तो एक नए राज्य के लिए आन्दोलन शुरू कर दिया, ताकि जब राज्य बने तो उसके नेता वो ही हो.

तेलंगाना के लिए भी ऍम. चेन्ना रेड्डी ने 1969 में आन्दोलन शुरू किया. इंदिरा गाँधी ने उनकी प्रजा राज्यम पार्टी को कांग्रेस में मिला लिया और उन्हें आंध्रा का मुख्यमंत्री बना दिया और आन्दोलन बंद.

के. चंद्रशेखर राव जो अब इस आन्दोलन के अगुवा थे, 1999 के चुनावों के बाद चंद्रशेखर राव को उम्मीद थी कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा लेकिन उन्हें डिप्टी स्पीकर बनाया गया. वर्ष 2001 में उन्होंने पृथक तेलंगाना का मुद्दा उठाते हुए तेलुगु देशम पार्टी छोड़ दी और तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन कर दिया. अब जब नया राज्य बन जायेगा तो वही मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे. आखिर उन्होंने एक राज्य के दो हिस्से जो करवा दिए.

 मेरी महत्वाकांक्षा

मेरे पास राज्य बनाने लायक आन्दोलन के लोग तो है नहीं, न ही मेरा कोई राजनैतिक करियर है तो मुझे लगता की मुख्यमंत्री बनने के लिए मुझे छोटे स्तर से शुरू करना होगा. वैसे भी राजनीती में तो लोग ६० साल में युवा कहलाते है, तो मैं अभी आधी उम्र का हू, वक़्त भी है.

मेरी मांग

मै चंडीगढ़ के सेक्टर 37 को अलग शहर बनाने की मांग करता हू. मुझे 200-250 लोग वह जानते भी है. एक बार सेक्टर ३७ शहर बन गया तो मै मेयर बन जाऊंगा.

मेरी आगे की योजना

बाद में मै सेक्टर 38 को भी संस्कृति के आधार पर अपने शहर में मिलाने की मांग करूँगा. मैंने इस साजिश में अपने कुछ वरुण बजाज, गौतम मेहता और अनुराग भटेजा को भी शामिल किया है. वरुण सबसे पहले अपने पड़ोसियों के मकान को अपने मकान में मिलाएगा क्योकि इन सबके मकानों की बनावट एक जैसी है. इसके बाद गौतम पंचकुला को अलग राज्य बनाने की मांग करेगा क्योकि पंचकुला में हरियाणा की भाषा और संस्कृति दिखती ही नहीं.

इन सब के लिए अनशन की जरूरत पड़ेगी जोकि हमारा दोस्त अनुराग भटेजा करेगा. अनुराग वैसे भी अपना वजन कम करने को dieting करने वाला था. लगे हाथ अनशन करने से एक पंथ दो काज हो जायेंगे.

मै इस आन्दोलन का समर्थन करते हुए सेक्टर 37-38  को पंचकुला राज्य में मिलवा दूंगा.

मंत्रिमंडल

चुकी सारी योजना  मेरी है इसलिए मुख्यमंत्री तो मै ही बनूँगा. गौतम बोलता अच्छा है इसलिए उसे विधानसभा का स्पीकर बना दूंगा (वहा कोई उसे बोलने नहीं देगा). अनुराग को अनशन के बाद खाना (पैसा) होगा इसलिए उसे खाद्य मंत्रालय देंगे. वरुण पर इस दौरान कब्ज़ा करने के मुक़दमे होंगे इसलिए निपटने को उसे गृह मंत्रालय दे देंगे.

मुझे गौतम और अनुराग पर भरोसा है पर वरुण शायद उप-मुख्यमंत्री पद की मांग करे, अगर उसने ऐसा किया तो उसके खिलाफ कब्जे के मुकदमो को CBI को दे दूंगा ताकि वो ठंडा पड़ जाये.

तो मेरे दोस्तों हाथ मिलाओ, हम एक नया राज्य बनाए और केंद्र से मिलने वाले फंड  को मिल बाँट कर खाए.

जय हिंद.

Hindi Satire on politicians demanding separate states just to fulfill their political desires.

मै मुख्यमंत्री बनना चाहता हूँ

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23 thoughts on “मै मुख्यमंत्री बनना चाहता हूँ

  1. हाहाहा… जान कर अच्छा लगा की आपने हमारे लिए भी कुछ सोचके रखा है! हमें ये पद सवीकार है. सभी आदर देते है! बात सुने न सुने वो अलग बात है!
    सो हम जल्द ही पंचकुला राज्य की मांग बुलंद करते हैं और पंचकुला सेक्टर 5 चौक ऐवें चंडीगढ़ मटका चौक पर धरना पर्दर्शन से शुरुआत करते हैं! मीडिया को भी आमंतर्ण दिया जाना बहुत ज़रूरी है! आखिर बिना publicity का पर्दर्शन भी किस काम का! बाकी भटेजा जी की हस्पताल मैं भी फ्लिम बनवा देंगे! सहानुभूति भी मिल जायेगी!

  2. Arey waah!!

    Chliye… aapke is “swaarth pare sankalp” mein main NRI supprt bhii karti hoon. Aur waise bhii…harr party/ministry mein ek mahila ka hona aawashyak hai. “Equality of gender” ke naam pe.

    Aap mujhey apnein party mein shaamil kar lijiye… aur chuki mujhey muft mein ghoomnein se koi aitraaz nahin… aap tourism mantralay hamein saunp dijiyega.

    Aur agar…kisi kaaran aapneinhamein apnein party kii ticket nahin di yaa mantri nahin banaya… toh ham aapke khilaaf … aandolankariengey… Aur ye khabar… DP mei chapwaayeinegy. Baaki media coverage khud ba khud mil jayega.

    Hahahahahahahha…

    Kaisa raha… hamaara agenda?? :D:D:D:D

  3. good joke, but please be serious in this regard as you live in a developed place like Chandigarh/haryana/punjab,you can never feel and understand pain of a neglected and backward place.See how Uttarakhand and chattisgarh have developed after their creation.Similar states like vidarbha,harit pradesh ,bundelkhand and gorkhaland must be created for speedy and effective implementation of democracy and developement.Jai Hind

  4. @all: Thanks for your comments.

    @jitu / khyati: खरबूजा कटेगा, सबमे बटेगा.

    @shweta: I am becoming politican not social worker. Politicians KRA is his & his familiy members welfare not nation. How can i be separate from them?

    @deepinder: politcians are joking with us, so now we are making joke of them,

    @B.N. Ghoshal: I agree some areas are not developed, but who is responsible? The leaders who are fighting for separate state can also fight for the development. THey are not fighting for development as their political ambition will not be fulfilled. Thats why i quoted late. M. Chenna Reddy, he raised vocie of “Jai Telangana” & after being CM he forgot Telangana. Who stopped him from developing telangana as CM.

    SO many states, how they will survive. Chhatisgarh & Jharkhand are natural resource rich states so they developed. Maithils are asking separate state mithilanchal, now mithila don’t have proper agriculture, no industries, no natural resuorces. How this state will survive?

  5. dear ek rao kam tha kya jo tumney bhi than liya, are yaar tumhe to hamne apna PM soch rakha tha aur tum toa thare ki bus CM par hi mangey. downmarket thinking nahi kuch……

  6. Dear Naveen, your opinion may be right in some cases but not be 100 % perfect.I agree with what you expressed about people like M Chenna Reddy an Subhash Ghising but it is not universal exceptions are their people like Late Potti Sriramulu’s fast until death resulted in creation of Andhra Pradesh.Without naural resources Uttrakhand states development and governance is now far ahead of Uttar Pradesh.So I am no saying consider every demand but government should rethink about presently existing un justified states like UP and should consider genuine and valid reasons to reorganize new deserving states like Vidarbha and western UP.

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