सुदामा revisited

 

द्वापरयुग से कलियुग आ गया  पर सुदामा के हालात आज भी वैसे ही हैं| वही गरीबी और अकाउंट में नाममात्र के रुपये| सुदामा काफी परेशान है| बीवी ने एक कोठी बनवाई है पहाड़ी पर| वहाँ जाने के लिए भी हेलिकोप्टर से जाना पड़ता है| कैसे इस गरीबी की हालत में बीवी को कोठी बनवा के दे? कैसे अपने बच्चों की परवरिश करे? आप कहेंगे की जब सुदामा की चादर लंबी न थी तो पैर क्यों फैलाये? अब ये सुदामा कलयुग का है, इसे इश्क हो गया एक राजकुमारी से और इसने उससे शादी कर ली| अब इस बिचारे का छोटा मोटा धंधा, उससे राजकुमारी का खर्चा कैसे चले?

 

सुदामा की पत्नी ने सुदामा से कहा की तुम इतने जो परेशान हो कृष्ण से मदद क्यों नहीं मांगते? सुदामा सकुचाए, बोले की क्या कृष्ण मुझे पहचानेंगे? पत्नी ने फिर कहा तुम जाके तो देखो, द्वापरयुग में भी तुम ऐसे ही परेशान थे पर काम हुआ था न| सुदामा को पत्नी की बात ठीक लगी और पहुच गया कृष्ण के पास| कृष्ण ने सुदामा को देखा और पल में पहचान लिया| कृष्ण ने सुदामा को बिठाया और हालचाल पूछा| सुदामा संकोच के मारे कुछ न कह पाया| वो तो कृष्ण के ठाठबाट को ही देखता रहा| कृष्ण ने पूछ ही लिया – सुदामा तू कुछ बता तो रहा नहीं, चल अब ये ही बता दे की मेरे लिए कुछ लाया की नहीं? दिखा कहीं कोने में चिवडा तो नहीं छुपा रखा तुने पहले की तरह? पर सुदामा खाली हाथ था| उसने आँखे झुकाई, कृष्ण से इधर उधर की बातें की और वापस चल दिया|

 

कृष्ण को पता था की मेरा सुदामा एक छोटे से शहर का छोटा सा व्यापारी है, पर उसने शादी एक राजकुमारी से की है| उसे मदद की जरूरत है| जब सुदामा घर पंहुचा तो देखा पत्नी बहुत खुश है| बोली मैं न कहती थी की जाओ अपने मित्र कृष्ण के पास| वो सब ठीक कर देंगे| सुदामा बोला – कुछ न हुआ प्रिये, मैं कृष्ण को कुछ न बता सका और खाली हाथ आ गया| सुदामा की पत्नी बोली – तुम्हारी ये मजाक की आदत गयी नहीं| देखो कृष्ण ने क्या भिजवाया है? और उसने एक लिफाफा सुदामा को पकड़ा दिया| सुदामा ने कांपते हाथो से लिफाफा खोला| लिफाफे में एक चेक था 65 करोड रुपये का और साथ में एक अग्रीमेंट भी, जिसमे लिखा था की ये पैसा बिना किसी शर्त के, बिना ब्याज के सुदामा को कृष्ण के कोष से दिया जाता है| सुदामा इन पैसों से अपना धंधा करे और पैसा कमा के लौटा दे|

 

सुदामा को पता था की सबसे ज्यादा मुनाफा जमीन जायदाद के धंधे में है| उसने तुरंत मौके का फायदा उठाया और कृष्ण के ही पैसे से कृष्ण की कंपनी द्वारा बनायीं गयी कुछ कोठियां खरीद ली| पर कृष्ण को पता था की ये तो एक ही कोठी में बिक जायेगा, इसीलिए उन्होंने झोपडी की कीमत में कोठियां सुदामा को दे दी|

 

युग कोई भी हो द्वापर या कलियुग, दोस्ती तो दोस्ती रहती है, दोस्त दोस्त के काम आता है | कृष्ण ने आज भी सुदामा को सहयोग किया| वो सुदामा जिसके अकाउंट  में 5 साल पहले 50 लाख रुपये थे, आज उसी सुदामा के पास अकाउंट में 300 करोड है|  पर ऐसा नहीं की दोस्त की मदद बेकार गयी, सुदामा की दुआए भी कृष्ण को लगी| सुनते है की सुदामा की मदद की एवज में महारानी जी (सासू माँ) के खास राजाओ ने कृष्ण को अपने राज्यों मिटटी के दाम में जमीने दे दी है| अब जितना कृष्ण कमाएंगे उसका एक हिस्सा सुदामा को भी मिलता रहेगा, अब वो भी कृष्ण की कंपनी में हिस्सेदार है|

 

तो दोस्तों याद रखना, युग कोई भी हो दोस्ती निभाते रहना| पता नहीं कब कोई कृष्ण मिल जाये और सुदामा को रंक से राजा बना दे|

नोट: अगर आपकी धार्मिक आस्थाओं को चोट लगी कृष्ण के नाम से तो माफ़ी, पर दोस्ती के और किसी का नाम सूझा नहीं|

सुदामा revisited

Post navigation


5 thoughts on “सुदामा revisited

  1. Bhai waah!!

    Sahii Vishleshan!! 🙂

    Waise main soch rahii thii… merey ek “Krishna roopi” babaji se dosti hai. Usne madat maang ke dekhti hoon. 😛 Kaun jaanein.. meri bhii bhaag khul jaye aur mein karodpati bann jaaun. 😛

    :D:D:D:D:D

  2. sir, nishichit rup se jadoo hai lekhni me… bechara Arjun(Kejribal) alias Chanakya sun ke sharma jayega…

  3. Achha aur Sachha vayngya hai…..Mujhe aisa lagta hai East India co. ne Bharat se jitna 250 saalon me nahi Kamaya us se kahi jyada ye nakli desh bhakta kama ke videsho me le jayenge….Ek baat aur aane wale kuchh saalon me Iss desh ki kul sampatti ka bahut bada hissa kuchh gine chune logo ke haath me simat ke reh jayega….Ek aur kranti ka bigul bajega…..??

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *