….और दुर्योधन केस जीत गया

 

 ब्रेकिंग न्यूज़ – द्रौपदी के साथ दुर्व्यवहार के दोष दुशाशन और दुर्योधन को कोर्ट ने बरी किया.. सभी टीवी चैनल पर यही ब्रेकिंग न्यूज़ है. बताते है की ये मामला 19 साल पुराना है, इस घटना में द्रौपदी ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी और मामले के दोषियों को कोर्ट में निर्दोष साबित कर दिया गया..

आखिर माजरा क्या है, ये द्रौपदी दुशाशन और दुर्योधन कौन है, कब का मामला है, इस केस में क्या – क्या हुआ जानने के लिए देखिये हमारा विशेष कार्यक्रम रात 8 बजे.. टीवी चैनल पर लगातार इस कार्यक्रम को देखने के लिए विज्ञापन आ रहे थे. 

मामला

टीवी चैनल ने दिखाया की 19-20 साल पहले हस्तिनापुर के एक बड़े पुलिस अधिकारी दुशाशन ने द्रौपदी नाम की एक बाला का वस्त्र हरण किया. द्रौपदी ने अपने परिवार के साथ जब इस मामले की रिपोर्ट करानी चाही तो पुलिस वालो ने अपने ही अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया. द्रौपदी का परिवार मुख्यमंत्री दुर्योधन से मिला और मदद मांगी, लेकिन उनकी बेचारी किस्मत की दुर्योधन तो दुशाशन के सर पर हाथ रखे हुए था. मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, उलटे मुख्यमंत्री दुर्योधन के यहाँ से उन्हें धमकिया ही मिली.

इस समय द्रुपद (द्रौपदी के पिता) को एक ईमानदार वकील और पारिवारिक मित्र युधिष्ठिर मिले, जिसने इस मामले में उनकी मदद करने का वादा किया. युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाई नकुल और सहदेव जो एक मीडिया कंपनी में काम करते थे उनकी मदद से मामले को उठाया और मजबूरन पुलिस को मकदमा दर्ज करना पड़ा, पर पुलिस ने मुक़दमे में वस्त्र हरण की बात गायब करके सिर्फ छेड़खानी लिखा.

इस मुक़दमे के बाद दुशाशन और दुर्योधन के रिश्तेदार शकुनी जो कैसिनो और कई बार के मालिक है उन्होंने अपने गुंडों से द्रौपदी के घर हमला करवा दिया, किस्मत से उस समय उनके घर पर युधिष्ठिर के भाई भीम और अर्जुन जो की क्रमशः कुश्ती और शूटिंग के चेम्पियन है मौजूद थे. इन दोनों ने मुकाबला करके इन गुंडों को भगाया. इस घटना के बाद मुख्यमंत्री दुर्योधन ने दुशाशन को प्रमोशन देकर  हस्तिनापुर राज्य का DGP बना दिया.

DGP बनते ही दुशाशन ने भीम और अर्जुन को ड्रग्स और कार चोरी के झूठे मुक़दमे दर्ज करके जेल में बंद करवा दिया. कोर्ट में दुशाशन के वकील ने द्रौपदी के चरित्र पर उंगलिया उठा दी. उन्होंने साबित किया की द्रौपदी के युधिष्ठिर और उसके चारो भाइयो से अवैध सम्बन्ध है. इस से आह़त होकर द्रौपदी ने आत्महत्या कर ली. पुलिस भीम और अर्जुन के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाई और वो बरी हो गए.

इस घटना के 19 साल बाद कोर्ट का निर्णय आया की इस मामले में दुशाशन निर्दोष है और दुर्योधन का भी केस को दबाने में कोई हाथ नहीं है. टीवी चेंनलो  ने ये फैसला आने के बाद बहुत शोर मचाया. उस समय के मुख्यमंत्री दुर्योधन के पीछे पद गए की उन्होंने दुशाशन को आरोपी होने के बाद भी न सिर्फ प्रमोशन दिया बल्कि बचाया भी. दुर्योधन चारो तरफ से होते सवालो घबरा कर चिल्ला उठे की मैंने दुशाशन को नहीं बचाया.

इसके साथ ही दुर्योधन की आँख खुल गयी. ये सब तो असल में हुआ ही नहीं, फिर ये क्या देख रहे थे.. दरअसल  एक टीवी चैनल ने नया एक नया कार्यक्रम “राज अगले जनम का” शुरू किया है. इस कार्यक्रम में आप देख सकते है की आप अगले जनम में क्या बनेंगे और क्या करेंगे. दुर्योधन इसी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे और ये उनके अगले जनम की कहानी थी. दुर्योधन को इच्छा हुई की वो देखे अगले जनम में भी दुर्योधन के नाम से ही जाने जायेंगे या कुछ और. तो उन्होंने फिर आँख बंद की और अगला जनम बताने वाली मशीन में लेट गए. मशीन ने बताया की अगले जनम में दुर्योधन ने खुद को भगवान का भक्त दिखाते हुए ३ धार्मिक नाम रखे, ये नाम थे “ओम” “भजन” और “बंसी”. द्रौपदी का नाम अगले जनम में रुचिका बताते है, दुशाशन का नाम तो आप जान ही गए होंगे.

डिस्क्लेमर: इस कहानी के सभी पत्र काल्पनिक है. उनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है. अगर कोई घटना वास्तविक जीवन से मेल खाती हो तो उसे सिर्फ संयोग ही समझा जाये.

….और दुर्योधन केस जीत गया

Post navigation


5 thoughts on “….और दुर्योधन केस जीत गया

  1. व्यंग्यकार,
    बहुते उम्दा लिखने लगे हो आजकल.
    पहले ब्रांड के कलाकार,
    फिर चित्रकार
    और अब व्यंग्यकार.
    और कितने आकार-प्रकार है तेरे?

  2. एक पात्र के बारे में मैं भी जानता हूँ विदुर का नया नाम नवीन चौधरी है ,
    बहुत बढ़िया जा रहे हैं
    दिशा ,दशा और गति तीनो ठीक हैं,
    इन्सुरेंस तो आप करवा ही रहे हैं डिस्क्लेमर के बहाने
    अच्छा हैं
    दुर्घटना कि संभावना जितनी कम हो सके उतना ही अच्छा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *