एक बच्चा था रोहित. बच्चा वो सिर्फ दिमाग से था, शरीर से बड़ा था. उसकी नेकनीयती पर कोई शक नहीं पर दिमाग कमजोर होने से कई ऐसे काम नहीं कर सकता था जो बड़े करते थे. एक दिन उसे एक एलियन मिला जिसका नाम था ‘जादू’. एलियन भटक कर धरती पर आ गया था और खो गया. रोहित ने एलियन को अपने साथ रखा और एलियन ने खुश होकर उसे शक्तियां दी जिससे रोहित को स्मार्ट हो गया, डांसर बन गया, गाना गाने लगा, लड़की भी पटा ली और विलेन को जो उठा-उठा के पटका कि पब्लिक ने सीटियाँ बजाई. अब ये तो फिल्म थी, लोगों को जादू पसंद आया और उन्होंने हृतिक रोशन की फिल्म ‘कोई मिल गया’ को सुपरहिट बना दिया.

अब फ़िल्में जीवन से प्रेरित होती है और जीवन की कई घटनाएँ फिल्मों से. ‘कोई मिल गया के रोहित’ जैसा ही एक मासूम बच्चा राजनीती में भी है ‘कांग्रेस का राहुल.’ कांग्रेस वालों की नज़र में राहुल गाँधी हमेशा से स्मार्ट थे पर पब्लिक ने उन्हें जादू से भेंट से पहले वाला रोहित ही माना.

कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगा कि जैसे इस फिल्म में रोहित एक ही दिन में स्मार्ट हो गया वैसे ही अगर हम भी कोई दुसरे ग्रह से ‘जादू’ ले आयें तो राहुल बाबा भी स्मार्ट हो जायेंगे. जादू की खोज शुरू हुई पर दूसरे ग्रह जाने की जरूरत नहीं पड़ी. यहीं विदेश से Cambridge Analytica नाम की एजेंसी को ले आये. ये वही एजेंसी है जिसने ट्रम्प के लिए काम किया था. एजेंसी वालों ने सबसे पहली चीज बताई कि देखो राहुल बाबा स्मार्ट नहीं है. सारा देश कह रहा था पर कांग्रेसी माने नहीं, पर करोड़ों खर्च के बाद एजेंसी बोली तो मान लिया. वैसे भी कांग्रेसी बिना करोड़ों के बात सुनते कहाँ है. खैर एजेंसी बोली कि टाइम है जब राहुल बाबा स्मार्ट बातें करें, अपनी पर्सनालिटी के दूसरे हिस्सों को दिखाएँ जिससे जनता जुड़े.

राहुल बाबा ने ट्विटर पर जबरदस्त तीखे बाण छोड़े, खुद लिखे या किसी से लिखवाए वो अलग विषय है. स्कूल में जब किसी दोस्त को लड़की पटानी होती तो सारे दोस्त मिलकर उस लड़की के सामने उसकी हर चीज की तारीफ करते. उसके घटिया चुटकुलों को माइंडब्लोइंग बोलके हँसते ताकि लड़की इम्प्रेस हो जाये. कांग्रेस के मीडिया में दोस्त हैं ही. मीडिया वालों ने राहुल के हर ट्वीट पर कहना शुरू किया – माइंडब्लोइंग. पर जनता के माइंड में कुछ गया ही नहीं, वो तो बिचारी आलू में सोना खोज रही थी. हमें राहुल के ट्वीट के आधार पर बताया जाने लगा कि राहुल का नया अवतार राहुल गाँधी 2.0 आया है और ये नया वर्जन कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा.

अब अगर ट्वीट और फेसबुक पर लिखे मजेदार पोस्ट के आधार पर ही हमें नेता चुनना है तो भैया मैं क्या बुरा हूँ. कटाक्ष लिखता हूँ, हर पोस्ट पर हाहा वाले सैकड़ों रिएक्शन पाता हूँ. लगभग 2 लाख लाइक भी हैं पेज पर. मुझे ही प्रधानमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट कर देते. मेरे तो बहुत सारे दोस्त भी व्यंग्यकार हैं. जिस-जिस के पोस्ट पे ज्यादा लाइक आते हैं वो सब मंत्रिमंडल में आ जाते. सब कुछ तो सेट है, पर अफ़सोस ये कि जनता ऐसे नहीं देखती. वो सुनती सब है पर समझती अपने हिसाब से है.

Presstitute
Yo Rahul Gandhi So Smart

Cambridge Analytica की दिक्कत सिर्फ राहुल बाबा का स्मार्ट होना ही नहीं है. मीडिया से जो चीयरलीडर पकड़े वो भी रोहित जैसे ही निकले. फर्स्टपोस्ट के एक पत्रकार बंधू राहुल की स्मार्टनेस से लेके पर्सनालिटी के दूसरे हिस्से पर रोज ऐसे-ऐसे आर्टिकल लिखने लगे कि जिसने पढ़ा पेट पकड़ कर हंसा. उन्होंने लिखा कि राहुल की अकीदो वाली फोटो देखकर लोगों के दिल में उनके लिए इज्जत बढ़ गयी. मैं उस आदमी को आजतक खोज रहा हूँ जिसने इस कारण राहुल गाँधी की इज्जत की. उसे एक अवार्ड तो मिलना चाहिए. शायद उन्होंने सोचा होगा कि जिस देश में कुश्ती के अलावा सब कराटे माना जाता है वहां अकीदो किसी को समझ क्या आएगा और हम लोग तो जो समझ नहीं आता उसे महान मान लेते हैं.  

आगे लिखते हैं कि राहुल ने लड़कियों के साथ न सिर्फ सेल्फी ली बल्कि तब तक उसका हाथ पकड़े रखा जब तक वो उनकी गाड़ी से उतर नहीं गयी. लोग उनकी सहृदयता के कायल हो गए. ऐसी सहृदयता तो हमारे यहाँ के लौंडे आये दिन दिखाने को तैयार रहते हैं. हाँ अगर राहुल बाबा उन सेल्फी वाली लड़कियों को टैग कर देते तो शायद दो-चार लड़के उनके कायल हो सकते थे. यहाँ पर मेरी सलाह इतनी ही है कि मुकाबला सेल्फी किंग से है, मत पड़ें इस चक्कर में.

जहाँ भाजपा जमीन बचाने में जुटी थी वहां कांग्रेस राहुल बाबा 2.0 मार्केट में लांच करके गुजरात का चुनाव जीतने चली थी. अब राहुल बाबा iOS तो हैं नहीं कि जनता हाथों-हाथ उनका नया वर्जन सिर्फ मीडिया रिव्यु पढ़ के अपडेट कर ले. मीडिया के उनके दोस्तों ने प्रचार करना शुरू किया कि भाजपा इतनी बुरी तरह से हारने वाली है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती. 50 सीट आ जाये तो बहुत.

चारों तरफ ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हुई जैसे राहुल गाँधी भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार हो गए हैं. भगवान विष्णु के हाथ में चार चीजें होती है – शंख, चक्र, गदा और कमल का फूल. राहुल गाँधी के हाथ में भी चार हथियार थे गुजरात में:

  1. जिग्नेश मेवानी, अल्पेश ठाकोर और हार्दिक पटेल जैसे तीन आउटसोर्स किये नेता, जिन्होंने जातिवादी आंदोलनों के जरिये सरकार के खिलाफ माहौल बना रखा था. इन्हें गदा की तरह इस्तेमाल कर सरकार का सिर कुचला गया.
  2. 22 साल एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर को मोदी का गला काटने के चक्र की इस्तेमाल किया गया.
  3. GST और नोटबंदी से बाज़ार त्रस्त था. शंख की तरह से ये मुद्दा भी जोर-जोर से बज रहा था.
Rahul Gandhi in Gujarat temple
पंडित राहुल गाँधी

राहुल गाँधी का चौथा हथियार था मंदिर. राहुल मन्दिर-मंदिर जाकर चक्कर लगाने लगे. जनेऊधारी हो गए. अब मंदिर जाने से पहले शंख, चक्र और गदा का इस्तेमाल कर चुके थे इसलिए गुजरात की जनता ने राहुल गाँधी के हाथ में थमा दिया विष्णु भगवान का आखिरी सामान – कमल का फूल.  

मेरे पूर्व सीनियर प्रभात सिंह जी ने आज फेसबुक पर लिखा – “आबिद सुरती के ढब्बू जी दिन भर याद आते रहे. उनकी पत्नी अपनी पड़ोसन को बता रही थीं कि रेस में देखकर ही उनके पति बता देते हैं कि कौन सा घोड़ा जीतेगा. बाद में यह भी बता देते हैं कि अगर वह नहीं जीता तो क्यों नहीं जीता? मीडिया की हालत ढब्बू जी सी हो गई है.”

ढब्बू जी की तरह ही जो मीडिया राहुल 2.0 के फायदे गिना रहा था वही एग्जिट पोल के बाद से हमें ये बताने लगा कि अगर हारे भी तो राहुल की जीत होगी. राहुल अपनी जगह बनाने में कामयाब हो गए हैं. कांग्रेस की सीटें बढ़ी और भाजपा की घटी, ये सिर्फ सांत्वना है. इतने फैक्टर पक्ष में होने के बाद भी अगर आप हारते हैं तो दरअसल आप कहीं न कहीं जनता का मूड भांपने में नाकाम रहे.  

फिर भी आने वाले दिनों में जनता को यही बताया जायेगा कि राहुल हारा भी तो जीत गया है. हार कर भी जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं, ऐसे डायलाग फिल्म इंडस्ट्री के राहुल पर अच्छे लगते हैं न कि रियल लाइफ के. कांग्रेस को पता होना चाहिए हाशमी दवाखाना के विज्ञापनों पर भरोसा करने वाले लोग ही इस तरह की ख़बरों से मानेंगे कि राहुल कांग्रेस को नयी ‘ताकत’ दे पाए हैं.   

एक पत्रकार मित्र ने अभी-अभी बताया कि हार भी गया तो क्या मेहनत बहुत की. तारीफ करनी चाहिए मेहनत की पर जिसके सामने मेहनत कर रहे हैं उसे भी देखिये. वो 138 लोकसभा सीटों से 282 सीट बिना किसी सहारे के लाया. 47 से बढ़कर 312 सीटें उत्तर प्रदेश में हुई हैं. ना कोई अकीदो जानता था, ना सेल्फी ली थी. काउंटर में जो पॉइंट देंगे मुझे पता है इसलिए पॉइंट 1 और 4 फिर से पढियेगा.

राहुल बाबा से सहानुभूति है मेरी. सहानुभूति इसलिए क्योंकि उन्हें भाजपा से ज्यादा खतरा कांग्रेस वालों से है. राहुल को समझदार दोस्तों की जरूरत है कांग्रेस में भी और मीडिया में भी. आपका मुकाबला उस आदमी से है जो जमीन से जुड़ा है, चाय वाले के नाम पर वोट मांगता है, देश के लोगों की भावनाओं को समझता है और जरूरत मुताबिक उसका इस्तेमाल करता है. उसने उस मीडिया को अपना दोस्त बनाया है जो जमीन से जुड़े लोगों तक जाता है. राहुल बाबा के मीडिया वाले दोस्त 5 स्टार में बैठ वाइन के साथ गरीबी पर चर्चा करते हैं. 5 स्टार की खिड़की से देखने पर बाहर के धूप की तेजी पता नहीं लगती.

राहुल बाबा को इस हार से हताश नहीं होना चाहिए, ये हार उनकी नहीं है. ये हार उन मीडिया वालों की है जिन्होंने पब्लिक के साथ आपको भी फर्जी ख़बरों से गुमराह करने की कोशिश की. राहुल बाबा 3 काम करियेगा – पहला, ये जो मीडिया वाले अपने को सुपरस्मार्ट समझते हैं इन्हें लात मारकर, जमीन पर काम करने वाले मीडिया से जुड़ियेगा. दूसरा, अकीदो नहीं, कुश्ती में धोबी पछाड़ वाले दांव की एक तस्वीर लगाइयेगा. तीसरा, अगली बार कोई लड़की हाथ पकड़े तो थाम लीजियेगा.

जाते-जाते आखिरी बात. मीडिया के दोस्त कह रहे हैं राहुल ने चुनाव नहीं जीता तो क्या दिल जीता है. वैसे दिल का मुझे पता नहीं पर इन सब ख़बरों के जरिये गुजरात चुनावों के बीच राहुल गाँधी ने वो जीता है जिसे मोदी कभी नहीं जीत सकते और वो है कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी.

भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार: राहुल गाँधी

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7 thoughts on “भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार: राहुल गाँधी

  1. Pahle aapka blog achha lagta tha, par aab ais lagta hai aap pure BJP ke chamche, MODI SHaj ke bare mai likhane liye kaleja chahiye. Immandar ptrakar blogger hamesh shatta ke against likha, par aap to BJP ke agent ho

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