कैरोलिना मरीन “मिश्राइन” है. ब्राह्मण कास्ट…

 

सबसे पहले साक्षी मलिक जीती और उनके जीतते ही कुछ ‘बुद्धिमान जाटों’ ने बताना शुरू किया कि साक्षी ओलंपिक में देश को जिताने नहीं, बल्कि हरियाणा के ‘शांतिप्रिय आरक्षण आन्दोलन’ से हुई जाटों की किरकिरी का बदला लेने गयी थी.

Sakhi Malik Jat Pride
जाट नाम की लूट है, लूट सके तो लूट 

इतना हुआ ही था कि सिन्धु जीत गयी. बस लोगों ने जाटों से होड़ लगाके सिन्धु की जाति ढूंढनी शुरू कर दी. PV Sindhu Caste गूगल के सर्च ट्रेंड्स में काफी ऊपर था. देखा जाने लगा कि इसे दलित बना कर सवर्णों को गाली दें या सवर्ण बता कर दलितों को. हालाँकि ‘जुझारू जाट भाइयों’ ने यहाँ भी हरियाणे से सिन्धु का कनेक्शन निकालने की पूरी कोशिश कर डाली. इससे पहले कि जाट भाई सिन्धु को हरियाणे की छोरी बताते, आंध्र और तेलंगाना वाले भिड़ लिए कि कौन सा स्टेट सिन्धु का क्रेडिट ले जाये.

अब लोग-बाग जब उधर जाति ढूंढ रहे थे, तो अपने इधर UP में कुछ लोग चौपाल पर परेशान कि भाई हम लोग इस ओलंपिक से अपना रिश्ता कैसे जोड़ें? आखिर चुनाव भी होने वाले हैं और हम लोग ही जात-पात का बात नहीं करेंगे तो चुनाव की authenticity ही क्या रह जाएगी.

इस बार के चुनावों को मंदिर-मस्जिद से अलग रंग देने के लिए और ओलंपिक में बिना खेले हिस्सेदारी लेने जैसे  गंभीर मसले को सर्वसम्मति से तय करने को महासभा बुलाई गयी. सभापति जी बोले –हम सोच रहे हैं कि हम लोग सिल्वर और ब्रोंज नहीं, गोल्ड वाले से रिश्ता जोड़ेंगे. कैरोलिना मरीन को हम अपना मानेंगे पर उससे पहले ये पता करना जरूरी है कि – ऊ कैरोलिना मरीन कौन जात है? जब जात पता लगेगा तब चुनाव में इस्तेमाल किया जायेगा.

PV Sindhu cast

सबसे पहले मिश्र जी बोले – “रंग देखिये लड़की का दूध की तरह है. ब्राह्मण है.”

यादव जी तुरंत काउंटर किये – “दूध का काम हमारा है पंडित. दूध जैसी लड़की है तो यादव ही होगी. बोलो नेता जी की जय.”

मिश्र जी ने पलट कर जवाब दिया – दूध जैसा रंग तो सिन्धी का भी होत है जादव जी. पर उसका नाम “मरीन”. मिश्राइन का स्पेन में अपभ्रंश ‘मरीन’ हो गया है. कैरोलिना मरीन “मिश्राइन” है.

“मरीन तो मौर्य से भी बन सकत है पंडी जी” – मौर्य जी तुरंत चौका मारे.

“आरक्षण से नहीं पहुंची है वो टॉप पर. अपना ताकत से पहुंची है और ताकत किसी के बाजुओं में है तो वो है क्षत्रियों में. कैरोलिन क्षत्रिय है” – चौहान जी हिकारत से यादव और मौर्य जी को देख कर बोले.

“ताकत अगर जात से आती तो सारे फौजी राजपूत होते चौहान साहब. आप लोगों ने कैरोलिना के अन्दर का गुस्सा देखा? देखा उसके गुस्से से चिल्लाना, जब-जब वो एक पॉइंट लेती थी. ये गुस्सा और चिल्लाना यूँ ही नहीं आता. उसे दबाया गया है सदियों से और उसी का गुस्सा वो चिल्ला कर शटल कॉक पर निकाली है. ये ताकत उस दमन से लड़ते हुए आया है जो उसने सालों से झेला है. कैरोलिना ‘दलित’ है. जय भीम.” हाथ में नीले रंग का हाथी के निशान वाला झंडा लिया एक आदमी बोला.

इससे पहले कि कोई कुछ और कहता नेपथ्य से आवाज़ आई – The nation wants to know…

इस आवाज़ के आगे सबकी आवाज़ दब चुकी थी. कोई फैसला न हो पा रहा था. सभा के सबसे बुजुर्ग बुधिया ने अपने विचार सुनाते हुए कहा – “देखो भैया, जैसन ऊ लड़की चिल्लात रही हमका ता ऊ अरनब के रिश्तेदार लागत रही.”

बुधिया की बात लोग सुन ही रहे थे कि नेपथ्य से फिर गरजती आवाज़ आई – This is my show… Listen again, this is my show and I will speak here

शायद बुधिया की बातों का असर था कि इस आवाज़ के साथ ही सभा से लोग चुपचाप निकलने लगे. रास्ते में कुछ लोग बात करते सुनाई पड़े – “ऊ डोनाल्ड ट्रम्प कौन कास्ट है?”

कैरोलिना मरीन “मिश्राइन” है

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7 thoughts on “कैरोलिना मरीन “मिश्राइन” है

  1. नब्ज की पकङ कोई आपसे सीखे ।बहुत बढ़िया व्यंग्य

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