अच्छा तो भ्रष्टाचार को लोकतंत्र बचाओकहते है!

 

अनिल सर बोले कि सोनिया सड़क पर मार्च कर रही हैं, कुछ लिखो इस मुद्दे पर. मैंने कहा जरूर, और जैसे ही मुद्दा समझने के लिए खबर को पढना शुरू किया तो दिमाग का दही हो गया. सब पढ सुन के मैं एक निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस सरकार के आने के बाद देश में अच्छे दिन आये या नहीं ये भले ही बहस का मुद्दा है पर एक चीज जो बिना किसी बहस के मानी जा सकती है वो ये कि देश में चारों तरफ इन दिनों जबरदस्त माहौल है – IPL या Games of Thrones का नहीं, बल्कि हँसने-हँसाने का. नहीं आप गलत समझ रहे हैं, मैं कपिल शर्मा, TVF, AIB या न्यूज़ चैनलों की बात नहीं कर रहा जो हमें हमेशा हँसाते रहते हैं. ये सब तो हैं ही और अब इनके साथ जुड़ गए हैं हमारे नेता. कहते हैं कि किसी भी दर्द को भगाना हो तो हँसिये. बस यही मन्त्र लेकर हमारे नेताओं ने ठान ली है कि जनता को पानी, बिजली, सड़क, मुफ्त wi-fi दे न दें पर रोज हंसने की एक वजह जरूर देंगे.

आज से 4 साल पहले की राजनीती याद कीजिये, कितनी बोरिंग थी. मनमोहन सिंह थे, कलमाड़ी थे, राजा थे और कनिमोझी भी. सोनिया तो चुप ही रहती थी, ये अलग बात है की उनकी चुप्पी के मतलब गहरे थे. क्या किसी ने हँसने का मौका दिया? बोरिंग से घोटाले किये जिनपर एक ढंग का पंच तक न बन सके. और विपक्ष में भी थे तो कौन – जोशी जी जिनमें जोश न था और अडवाणी जी जिनके पास PM हाउस का एड्रेस न था. अब आज की राजनीती और खिलाडी देखिये, पक्ष विपक्ष में एक से एक टक्कर देने को लोग खड़े है. इधर मोदी हैं, तो उधर सोनिया हैं, नितीश हैं. इधर स्मृति ईरानी है तो उधर राहुल गाँधी और अरविन्द केजरीवाल हैं. इधर गिरिराज सिंह हैं तो उधर दिग्विजय सिंह, लालू यादव हैं. इधर साक्षी महाराज हैं तो उधर आशुतोष और कुमार विश्वास हैं. मतलब एक से बढ़कर एक और हर कोई गुणों-अवगुणों में एक दूसरे को टक्कर देने वाला. सरकार में एक हँसाता है तो विरोध में 2 हँसाते हैं.

तो अपन बात कर रहे थे सोनिया गाँधी की. खबर ये थी कि सोनिया गाँधी “लोकतंत्र बचाओ” रैली कर रही हैं. सोनिया जी और कांग्रेस के मुंह से लोकतंत्र शब्द सुनते ही ऐसी हँसी छूटी मेरी कि सीने से दिल लगभग वैसे ही बाहर आ गया था जैसे कांग्रेस से सीताराम केसरी. पर सीना अपना था कोई कांग्रेस नहीं, इसलिए दिल को सीताराम केसरी न बनने दिया और वापस अपनी जगह बिठाया. जब भाषण सुने तो ऐसा गश आया कि लिखने का होश ही न रहा. अब बात पुरानी हुई तो इस मुद्दे पर क्या लिखूं, बस एक वाकया बताता हूँ. मेरा बेटा 7 साल का है और नेताओं के शोर शराबे का ऐसा असर है कि वो मोदी, राहुल और केजरीवाल को पहचानता है और खबर सुन कुछ राय भी रखता है पर वो राय कभी और. मेरे साथ खाना खाते वक्त ख़बर देख रहा था तो पूछता है कि पापा ये अगस्ता क्या है और ये लोग लोकतंत्र बचाओ क्यों कह रहे हैं? मैंने अगस्ता भी समझाया और सोनिया जी का लोकतंत्र बचाने का पॉइंट (जो था नहीं) समझाने की कोशिश की. सुनने के बाद थोड़ी देर सोचता रहा और कहता है – अच्छा…. तो भ्रष्टाचार को लोकतंत्र बचाओ कहते हैं!

सुना है कि अब सलमान खान भी काले हिरण को बचाने के लिए सैफ अली खान के साथ रैली निकालने वाले हैं.

Sonia Augusta scam

बात जब रैली धरनों को हो रही हो अरविन्द केजरीवाल कहाँ पीछे रहते. अरविन्द केजरीवाल ने देश के लोगों को हँसाने में इतने कम समय ऐसा मुकाम तय किया है कि अमित शाह और अरुण जेटली को उनके स्तर पर पहुँचने को हाल में प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ी. अरविन्द जी यूँ तो मैदान काफी समय से डंटे हुए हैं पर सोनिया जी के लोकतंत्र बचाने के प्रयास पर सक्रिय होकर पहला ट्वीट डाला जिसे अंग्रेजी में Laughter Riot कहते हैं. मैं क्या कहूँ , खुद ही पढ़ लीजिये.

दरअसल अरविन्द केजरीवाल उस लड़की के बाप की तरह हैं जो न सिर्फ मोहल्ले में सबकी लड़कियों के अफेयर के बारे में पुख्ता सूचनाएँ देते हैं बल्कि किसी किसी के बारे में तो उसके लिखे 370 पन्नों के प्रेम पत्र पढने का दावा भी करते हैं. जिस समय वो ये सब कर रहे होते हैं उसी समय उनकी खुद की बेटी दीवार फांद कर किसी के साथ भाग रही होती हैं. पुराने समय में जब केजरीवाल जी और कुमार विश्वास स्मृति ईरानी पर कीचड़ उछाल रहे थे उस समय उनके कानून मंत्री फर्जी डिग्री मामले में जेल जा रहे थे. लोग हँसे पर केजरीवाल जी को हँसाने की सेवा जारी रखनी थी. बस तो उन्होंने ठाना कि चलो लड़की नहीं तो लड़की के बाप को लपेट लो और बैठे बिठाये बिचारे मोदी जी लपेटे में आ गए. भाजपा वालों ने बी.एस. बस्सी के साथ मिलकर पता नहीं कैसी डिग्री आप के नेताओं को दी कि केजरीवाल जी मोदी जी की डिग्री के पीछे पड़ लिए और ऐसा हाथ धो-कर पीछे पड़े हैं कि मोदी जी की डिग्री में स्पेलिंग मिस्टेक ढूँढने का काम आशुतोष को दिया है. वही आशुतोष जो responsible को reconcible लिखते हैं और फिर करेक्शन में resonsile लिखते हैं. वैसे जब से केजरीवाल जी वि.वि. के अधिकारियों के बयान और डिग्री को मानने से इनकार किया है तब से छात्र पूछ रहे हैं कि उनकी डिग्री पर VC और रजिस्ट्रार के साइन होंगे या केजरीवाल जी के?

सुना है कि लोढ़ा ग्रुप वालों ने कहा है कि हम पर कितने ही भ्रष्टाचार के आरोप लगा लो पर आशुतोष को हमारा नाम “लोढ़ा” कभी मत लिखने देना.

AAP on PM Degree

वि.वि. ने उनकी डिग्री को सही बताया है और मेरा नाम चूँकि अरविन्द नहीं इसलिए उनकी बात मानता हूँ, पर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आती कि अपने नाम से “कुमार” उन्होंने शादी से पहले हटा दिया या बाद में? अगर नाम बदलना ही था तो दिलीप कुमार रख लेते उस टाइम में सुपरहिट थे. खैर मार्कशीट सही बताने के बावजूद भी देखा जाये तो मोदी जी की हालत इस मामले में बुरी है. इधर बच्चों के रिजल्ट आ रहे हैं और उधर मोदी जी की मार्कशीट. थर्ड डिवीज़न से पास होने वाले बच्चे कह रहे हैं कि वो PM बनेंगे और फर्स्ट डिवीज़न वाले CM. मुझे कोई पूछे कि ऐसा क्या है जो तुम्हें बचपन से बेहतर अब लगता है तो मैं जवाब दूंगा – मार्कशीट और रिजल्ट से पीछा छूटना. अब अप्रैल मई के महीने में कोई नहीं पूछता कि  कितने मार्क्स आये? और ऐसे समय में बिचारे मोदी जी को वो दिन देखना पड़ रहा है जो कोई भी वयस्क नहीं देखना चाहेगा. वैसे मोदी जी के जिस तरह के मार्क्स ग्रेजुएशन में आये हैं उसे देख के तो लगता है कि अच्छा किया प्रचारक ही रह गए वर्ना कैरियर की तो लग जाती.

सुना है इस बार मन की बात में मोदी जी बच्चों को कम मार्क्स आने के फायदे समझायेंगे.

Modi's degree

लिखने को बहुत हैं इन पर दोस्तों पर नेताओं पर हँसते हंसाते 1200 शब्द हो गए. आपका धन्यवाद् कि आप हिम्मत करके इस लाइन तक आप पहुँच गए हैं. नेताओं को देखते सुनते रहिये हँसते रहिये, स्वस्थ रहिये. और हाँ जाते जाते एक और बात – इधर वसुंधरा हैं तो उधर वाड्रा हैं. सिर्फ यही हैं जो एक पर एक भारी हैं.

नोट: मुझे लिखना सोनिया जी की रैली पर था पर चूँकि बात एग्जाम की चल रही थी तो बस मैंने २ क्वेश्चन के आंसर एक में लिख दिए हैं. बच्चे चाहें तो सीख सकते हैं ये हुनर. ऐसे आंसर देने वाले केजरीवाल जी को पसंद हैं. वो आपको डिग्री भी देंगे और salute भी. जय हिन्द.

…अच्छा तो भ्रष्टाचार को ‘लोकतंत्र बचाओ’ कहते है!

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