चौपट राजा

 

चौपट राजा बहुत परेशान हैं| उन्हें समझ ही नहीं आ रहा की आखिर हुआ क्या? ये दबी और सोयी हुई जनता उठ के हमारे खिलाफ खड़ी क्यों हो गयी? इससे अच्छा तो हमारा राजतन्त्र था, किसी की मजाल न होती थी कुछ बोले, पर जबसे देश में हमने लोकतंत्र लागू किया है ये सब तो खुद को राजा समझने लगे|

खाना खाते समय रसोइये ने पूछ लिया – महाराज, यूँ तो हमेशा मौन रहते है पर आज आपके मौन के अंदर एक और मौन छुपा लग रहा है| चौपट राजा की यूँ कोई सुनता नहीं, इसलिए रसोइये के सामने ही फट पड़े| पूछा की हमने जनता और देश के लिए इतना कुछ किया फिर भी लोग मुझे गालियाँ क्यों दे रहे है? सड़कों पर क्यों उतर आये है? एक आंदोलन कर के उसे आज़ादी की दूसरी लड़ाई का नाम दे रहे है? बताओ ऐसा होता है भला? लोकतंत्र है तो कुछ भी बोलेंगे?

रसोइया बोला – महाराज जनता का मानना है की आप कुछ करते ही नहीं और आपके वजीर करते है तो सिर्फ घोटाला| जनता के लिए कुछ नहीं करते| आप देखिये कितने बड़े घोटाले हुए आपके राज में| जनता क्या करे?

चौपट राजा बोले – ये जनता अजीब है, इसकी आदत ही है गलत चीजों पर ध्यान देने की| अच्छी बातें तो समझना और देखना ही नहीं चाहती| तुम हर घोटाले को देखो और उसमे छुपी अच्छाई को देखो|

सबसे पहले तो हमने घोटालों के स्तर को इतना ऊपर उठा दिया है की अब उससे छोटे घोटाले करने की किसी की इच्छा ही नहीं होगी और अगर किसी ने किया भी तो मीडिया उसे ज्यादा भाव ही नहीं देगा और ऐसे घोटाले कम हो जायेंगे|

खेल के आयोजन में चाहे जो पैसे खाए पर देश में हमने इतना बड़ा खेल मेला तो कराया, और हमारा देश कितने पदक जीता और तुम कुछ हज़ार करोड के घोटाले की बात करते हो? छी है तुम नादान जनता पर|

अगर मेरा वजीर 2G न करता तो हम 3G तक कैसे पहुँचते? और देखो 3G से कितना लाभ हुआ है और ये कितना फास्ट है की 2G का घोटाला तब पता न चला लेकिन 3G आते ही पता चल गया|

सबसे बेहतरीन घोटाला किया वो तो देश का एक आदर्श घोटाला था| उसने घोटाले में भी इमानदारी कितनी दिखाई गयी| हर किसी को चाहे बड़ा अफसर हो या छोटा सबको बराबर हिस्सा मिला| सबको 1-2 फ्लैट ही दिए| इतना भेदभाव रहित घोटाला कहीं हुआ है भला? जनता को तो नारे लगाने चाहिए – घोटाला हो तो आदर्श हो| हम तो इस बात पर बिल भी लेन वाले है की जब घोटाले का खरबूजा कटेगा तो सबमें बराबर बंटेगा| और सबसे खास बात की सारे दल इस बात पर दलगत राजनीती से ऊपर उठकर इसका समर्थन कर रहे हैं|  

रसोइया बोला – महाराज पर इस कटे हुए खरबूजे में जनता के हिस्से तो सिर्फ बीज आये है| जनता इस बात से भी परेशान है की राजा आप हैं पर निर्णय लेने के लिए हमेशा एक महिला का मुंह ऐसे ताकते है जैसे की वो आपकी मालकिन हों या इस देश की महारानी| आपने राजा से ऊपर महारानी को कर दिया है|

चौपट राजा बोले – फिर वही बात| ये वही जनता है जो हर चीज में विदेशों की नक़ल करना चाहती है अंग्रेजों को देख कर खुश होती है| अब देखो इंग्लैंड में भी तो प्रधानमंत्री के ऊपर महारानी होती है| हम भी अपने देश को इंग्लैंड ही बना रहे है| महारानी को राजा से ऊपर रख कर हम इंग्लैंड के बराबर पहुँच गए है|

रसोइया बोला – महाराज ये आपकी सोच है, जनता की नहीं| इसीलिए जनता आंदोलन करने सड़क पर उतर गयी है|

चौपट राजा बोले – ये आंदोलन तो फंडामेंटली ही गलत है| अरे जब भी कोई आंदोलन या क्रांति होती है तो उसका नेतृत्व युवा ही करता है और इस आंदोलन का नेतृत्व तो एक बूढा कर रहा है, इसलिए ये क्रांति गलत है| मैं इसे नकारता हूँ|

रसोइये ने पूछा – महाराज ये फंडामेंटल वाली बात किसने बताई आपको? आंदोलन तो कोई भी देश का नागरिक कर सकता है|

चौपट राजा – नहीं, तुम नहीं समझते| जो मैं कह रहा हू वो सही है क्योकि मेरे सलाहकार कानून के जानकार वजीर भी येही कहते है| उन्होंने तो इस आंदोलन में शामिल लोगो के घोटाले भी पकड़ लिए हैं| उन्होंने पता लगाया की ये सब भी बेईमान है|

रसोइया – महाराज, याद रखिये अब आप राजतन्त्र में नहीं लोकतंत्र में है| यहाँ पर इन वकीलों की सुनने की बजाय ज़मीन से जुड़े ओहदेदारों की सुनिए| और आपके ये वकील जिन घोटालों की बात कर रहे है वो सिर्फ इनके मुंह से बोले हुए है, साबित ये एक भी न कर पाए| आप भूल गए की आपके सलाहकार बेसिर-पैर बोल कर फिर माफ़ी मांगते हैं| आपके एक भी वजीर के पास जनता को दिखने के लिए कोई काम नहीं जबकि उस बूढ़े और उसकी टीम ने पहले आपने काम में इमानदारी दिखाई, काम करके दिखाया और अब आपको आगे बढ़ने को कह रही है| जनता कह रही है की आप भी काम करिये न की बदनाम| अगर सरकार काम करेगी तो जनता को किसी और के नेतृत्व में आने की जरूरत नहीं| जनता की आवाज़ को सुनिए महाराज|

चौपट राजा – अरे भाई सुन तो लिया, कह तो दिया की उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ सारे प्रस्ताव हम मान रहे है| और क्या चाहिए?

रसोइया बोला – महाराज देर से ही सही काम आपने दुरुस्त किया मगर ध्यान रहे की जो बाते कही है उनको अमल में भी लाये| ऐसा न हो की फिर आपके वजीर बोलते रह जाये और काम न हो? अगर ऐसा हुआ तो जनता इस बार उखाड फेंकेगी|

चौपट राजा बोले – अगर जनता ने हमें हटाया तो वो फिर मूर्ख बनेगी| देखो पहली बार जब हम जीते तो हमने अपने और अपने रिश्तेदारों की जेबे भरी| दूसरी बार जब हम जीते तो हमने सहयोगियों की जेबें भरी| अब तो जनता ही बची है| जनता इस बार जीतेंगे तो हम आपकी जेब भरेंगे| अगर आपने कोई और राजा चुन लिया तो फिर आपको १० साल तक उनकी जेबें भरने का इन्तेज़ार करना पड़ेगा|

तो याद रहे अगले चुनाव में फिर चुनिए चौपट राजा को और चुनाव चिन्ह है थप्पड़|

चौपट राजा

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