Letter to Akbar by Ravish Kumar & Reply by Bhakt

 

Pic Credit: Indian Express
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रवीश जी नमस्कार

सबसे पहले तो बता दें कि कैप्शन से कंफ्यूज न होइएगा. न हम आपको ‘दलाल’ कह रहे हैं, न ही खुद को ‘भक्त’, फिर भी ऐसा कैप्शन क्यों है इसके लिए आपको आखिरी पैराग्राफ तक जाना होगा.

आप की अकबर जी को लिखी एक खुली चिट्ठी पढ़े – Open Letter to Akbar by Ravish Kumar. क्या मारे हैं आप. भिगा के मारे हैं ऐसा तो नहीं कहेंगे क्योंकि आपका भिगा के मारने वाला स्टाइल इस चिट्ठी में था नहीं. आप तो बिहार से हैं, हम भी हैं – सौतिया डाह* तो जानते होंगे न. आप कहे हैं कि तल्खी से लिखा है पर आपका चिट्ठी पढ़ के लगा के कि सौतिया डाह में लिखा है.

सबसे पहिले तो माफ़ी. बात आपका और अकबर जी का चल रहा था और हम बेगानी शादी में अब्दुल्ला बन के कूद पड़े. आई ऍम सॉरी अगेन, अब्दुल्ला तो फारूख हैं, उनके साथ द सेक्युलर लगाना भूल गये थे. सो हम बेगानी शादी में ‘अब्दुल्ला – द सेक्युलर’ बनके इसलिए कूद पड़े क्योंकि अकबर तो बादशाह हुए, अब मंत्री भी, जवाब दें या न दें पर हम तो अपने प्रान्तवासी के साथ खड़े जरूर हो. क्योंकि सिर्फ बिहार ही नहीं हमारा आपका तो गाज़ियाबाद कनेक्शन भी हैं.

देखिये आपसे छोटे हैं पर छोटा-मोटा सलाह है. आप को ये पढने को मिलेगा इसी का पता नहीं अभी, तो मानने का रिक्वेस्ट तो क्या ही करें. एक बार राजदीप सर को भी लिखे थे मिल गया था तो इसी उम्मीद पर कि आपको भी मिलेगा, लिख रहे हैं.

पहला – देखिये आप गलत आदमी से सवाल पूछने चले गए. आप खुदे ही मान रहे हैं कि जीरो TRP वाले को विदेश राज्य मंत्री क्या जवाब दे. आप को ख्याल देर से आया होगा पर पहले आया होता तो दैनिक जागरण के गुप्ता परिवार से भी पूछ सकते थे. वो भी वरिष्ठ लोग हैं भाजपा और सपा करते रहे हैं. अख़बार तो चला ही रहे हैं वो देश का नंबर 1 रीडरशिप वाला. चलिए वो तो मिस हो गया. पर अभी भी इस नैतिक संकट से उबरने को कुछ ऐसे पत्रकारों से आप सलाह ले सकते हैं जो समवयस्क हैं और बेहद ईमानदार एवं अ-राजनैतिक पत्रकार हैं जैसे आशुतोष, आशीष खेतान, राजीव शुक्ल. ये लोग भी पत्रकारिता राजनीती पर नैतिक गाइडेंस दे सकता है. बस आशुतोष जी को कहियेगा आपको चिट्ठी हिंदी में लिखें. अंग्रेजिया में जो चिट्ठी आया न, तो शब्द ऑक्सफ़ोर्ड या कॉलिंस डिक्शनरी में खोजे नहीं मिलेगा.

दूसरा – विचलित हैं आप कि सब आपको कोस रहा है, गरिया रहा है. जब सारी गाड़ियाँ रोंग साइड आती दिखें तो एक बार अपना साइड भी देखना चाहिए. (वैसे अपना नॉएडा गाज़ियाबाद में सब रोंगे साइड चलता है). तो सलाह है कि एक बार आत्मावलोकन काहे नहीं करते. आर्ट ऑफ़ लिविंग में जाने का जरूरत नहीं है, कभी मोतिहारी जाइएगा तो फुर्सत में करियेगा. देखिये हम आपके बहुत बड़े वाले फैन हैं. इसमें किसी भी तरह का व्यंग्य नहीं हैं. इससे ज्यादा और क्या सबूत दें कि जिस टोन में लिख रहे हैं वो हमारा लिखने का टोन नहीं, बस आपको कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं. एक फैन होने के नाते हम फील किये कि आप थोड़ा तो बदले हैं. पता नहीं आप भावुक हैं, उसका असर रिपोर्टिंग पर आया या कोई और दबी वजह हो, पर फर्क तो आया हैं. पहले आप सबका सुनते थे और चुटकी लेते थे, अब आप एक खास पार्टी के लोगों पर आपको काउंटर करने पर खिसिया जाते हैं. खिसियाने के मामले में लार्ड अरनब का लेवल तो नहीं अचीव किये अभी आप, पर खिसियाने लगे हैं. आपका टीवी स्क्रीन काला, सफ़ेद, रंगीन जैसा भी रहे, हम हमेशा उसे बाहर से देखते हैं तो हमें थोड़ा ज्यादा साफ़ दिखता है. देखिये, हमें एक खास रंग पसंद है पर न्यूज़ देखते टाइम खासकर आपको देखते टाइम हम वो रंगीन चश्मा नहीं पहनते. आजकल हम भी आपको ज्यादा नहीं देखते क्योंकि जिस चुटीलेपन के लिए आपके फैन थे वो तो मिसिंग होता जा रहा है. रिपीट कर रहे हैं – आत्मावलोकन करियेगा

तीसरा – आपका चिट्ठी क्लियर नहीं है. आप तो पत्रकार हैं, भाषा पर पकड़ हैं पर फिर भी थोड़ा कंफ्यूजन है इसीलिए शुरू में लिखे कि ‘सौतिया डाह’ वाला चिट्ठी लग रहा है. आप अकबर जी से इसलिए गुस्सा हैं कि वो कांग्रेस से भाजपा में गए, या इसलिए गुस्सा हैं कि वो पत्रकार होकर भाजपा में गए, या इसलिए गुस्सा हैं कि वो दोनों पार्टी में एक साथ सेटिंग कैसे बिठा लिए और खाली टाइम में मोटी तनख्वाह लेकर नौकरी पर भी आ गए. वर्ना पॉलिटिक्स के साथ अख़बार तो चन्दन मित्रा भी चला ही रहे हैं. अगर आप तीसरे पॉइंट, दोनों पार्टी में सेटिंग और फिर मोटी तनख्वाह वाली बात से गुस्सा हैं तो हम भी आपके साथ हैं. यहाँ कंपनियां नो-पोचिंग अग्रीमेंट किये बैठी है और इन्क्रीमेंट देती हैं 5%-7%. साला, ऐसा नौकरी से तो अच्छा कि पॉलिटिक्स में ही चले जाओ. वहाँ नो-पोचिंग का लफड़ा नहीं और इन्क्रीमेंट मांगता ही कौन है. फर्जी कंपनी से 2-2 करोड़ का चंदा आ जाता है.

इसी बात से एक और सवाल – आपका चिट्ठी में एक और चीज क्लियर नहीं हो पा रहा है जहां आप लिखे कि “वैसे मैं अभी राजनीति में नहीं आया हूं। आ गया तो आप मेरे बहुत काम आयेंगे।” ये लाइन आप उनपर व्यंग्य में लिखे हैं या राजनैतिक दलों को बता रहे हैं कि भैया हम अभेलेबुल* हूँ. गुस्ताखी माफ़, पर कहा न कि वो चुटीलापन कम हो गया आपका इसलिए डाउट हुआ व्यंग्य पे. वैसे एक बात कहें, चले जाइये राजनीती में. बहुत स्कोप है, बस ध्यान रखियेगा कि आशुतोष को सौतिया डाह न हो जाये आपसे.

चौथा: आप छोटा-छोटा बात पर बहुत सोचते हैं जैसे कि आपका ये पॉइंट तटस्थता और राजनैतिक दल की विचारधारा वाला. आप पूछ रहे हैं “लिखते वक्त दिल दिमाग़ पर उस राजनीतिक दल या विचारधारा की ख़ैरियत की चिन्ता होती थी? जब आप पत्रकारिता से राजनीति में चले जाते थे तो अपने लिखे पर संदेह होता था? बस ऐसे ही सवालों के लिए गुलज़ार साहब लिखे थे एक गाना – “तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं”. आप एक बात बताइए जो लोग पत्रकारिता में ही हैं अभी भी क्या उनको लिखते वक़्त अपनी विचारधारा की खैरियत की चिंता नहीं होती? दूर क्यों जाना, अपने ही यहाँ बरखा मैडम को देख लीजिये. हाल ही में कन्हैया को गाँधी, भगत सिंह सब बना दी, जजमेंट दे दी कि विडियो फेक है पर बाद में असली निकला. पर क्या उनको संदेह हुआ अपने लिखे पर? नहीं न? कल उमर खालिद खुदा-न-खास्ता फिर कह दे भारत तेरे टुकड़े होंगे तो बरखा जी संदेह थोड़ी करेंगी, जजमेंट दे देंगी कि थोड़ा लेफ्ट से टुकड़ा कीजिये, और थोड़ा नार्थ से भी. अब ट्विटर ट्रोल की तरह नीरा राडिया वाली बात तक तो क्या ही जाऊं. जब पत्रकार लोग अपनी विचारधारा की खैरियत मना के लिखते हैं तो ये आदमी तो पॉलिटिक्स में गया हैं. मत सोचिये इतना छोटा-छोटा बात पर, वैसे ही आपका टीवी बीमार है, चिंता लगी है इस चक्कर में आप भी न हो जाएँ.

पांचवा: अंग्रेजी में कहते हैं न – लास्ट बट नॉट द लीस्ट. आपकी माँ को कोई गाली देता है न तो उसे नहीं सुनने का. आप बोले न, माँ पर बहस ख़तम है और हमारी भारत माता वही है. गाली को दिल पे न लेके गाली देने वाले के पिछवाड़े पर दीजिये. बिहार में होते तो कह देते बम फोड़ दीजिये, वैसे भी अब तो अपने लालू जी है तो डर भी नहीं. किसी को लॉजिकल बहस करना हो तो ठीक.

अब देखिये जैसा आजकल का ट्रेंड हैं कि व्यूअर एंकर को पार्टी से सवाल पूछने पर ‘दलाल’ बोलता हैं वैसे ही जर्नलिस्ट लोग उनसे सवाल पूछने या सलाह देने वाले को ‘भक्त’ बोलता है तो हमें पता हैं कि आप हमारा ये पोस्ट बिहारी / गाज़ियाबाद वाला भाईचारा नहीं समझेंगे, भक्त का चिट्ठी ही बोलेंगे. सो यू कैन कॉल इट इन योर स्टाइल – “ओपन चिट्ठी टू दलाल फ्रॉम अ भक्त”

आपसे तो बहुते अदना

नवीन कुमार चौधरी

झंझारपुर, जिल्ला: मधुबनी,

बिहार (भारत)

नोट: मधुबनी से तो आप समझिये गए होंगे कि हम जाट नहीं कौन जात हैं. अब भक्त के साथ ये न कह दीजियेगा कि ब्राह्मणवादी मानसिकता से लिखे हो.

*सौतिया डाह = Extreme Jealousy, *अभेलेबुल = Available

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चिट्ठी टू ‘सो-कॉल्ड’ दलाल फ्रॉम अ भक्त

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42 thoughts on “चिट्ठी टू ‘सो-कॉल्ड’ दलाल फ्रॉम अ भक्त

  1. धो डालें हैं भईया, वो भी बिना सबुनवा के।

  2. पढ़े लिखे भक्त है आप!चलिए अच्छी बात है,ऐसे भी लोग होने चाहिए।बाकी आप रविश कुमार के बारे में क्या सोचते है,ये आप के कैरक्टर के बारे में भी कुछ बताता है।

  3. पाजी तुस्सी ग्रेट हो ।तोहफा कुबूल करो ।

  4. चप्पल भीगा कर मारा है रविस कुमार को

  5. Kya mare hain bhai ji. Etna achha kaise soch lete hain. Bada badhiya likhe hain. Vaise ham bata rahe he ki aap bihar ke hain isliye chhor rahe hain. Nahi to manhani ka case kar dete. Jaldi se photo (letter) Delete kijiye

  6. @Naveen Ji..

    Dho dale malik…

    Sasura ghaziabadi cum Jaat cum Bihari …..

    Aaj ek or Jaat/Ghaziabadi/Bhakt ko fainwa bana liye……

    Rahi baat ravish ji tak pohchane ki to hum koshish karte hain aaj hi ho jaye
    @Prabhu Chawla ji apne barabar wale cabinwa main baithe hain subah 10:25 par aa gaye the ….

    Tanik maska laga ke aaj ka meeting fix karte hain Ravish ji ke sath

    Open Charcha of a Bhakt to Dalal

    BTW :- Konho other source of contact mil payega apka to ati anukampa hogi

  7. कंटेंट आपका थोडा कमजोर है,भाषा हलकी और पूर्वाग्रह ज्यादा।खैर ये मेरी अपनी राय हो सकती है।रविश कुमार को गरियाना और जम कर कोसने से बहुत लोगो की लेखनी की दुकान चल रही है। बाकी जो है सो हइये है!

  8. हमारा कंटेंट उतना स्ट्रोंग होता तो हम भी रवीश होते. आजकल तो ये ट्रेंड है कि दूसरे को गरियाए और अपनी लेखनी चलाये. रवीश भी वही किये, अपने पूर्वाग्रह को दिखाए और हम तो उनके पुराने फैन है. बस फॉलो किये उनको और जो वो लिखे उसी को दूसरी तरफ से लिख दिया है. बाकी सबका देखने का अपना नजरिया है. फिर भी आपका फीडबैक सराहनीय है, धन्यवाद. कंटेंट स्ट्रोंग करने के कोशिश जरूर करेंगे अगली बार. पढ़ते रहिएगा.

  9. Ye lo! Aap Ravish ke baare mein kyaa sochte hain iss se aapka character pataa chal gaya logon ko??

    Lagta hai Bandaa AAP ka hai. Tabhai karakter certeepheeket de rahaa hai.

    Ab jaraa aapke open letter pe bhii tippani de dete hain. Aur jor se ghumaaa ke maarna thaa thappad. Waise toh baaki sab theek thaa… bas… thodaa pheeka lagaa. Ravish ji ki ishtail copy karr rahe thein na. Toh kataaksh kam najar aaya.

    Likhte rahiye. Padh ke majaa aata hai. 🙂

    Ek bhaktin

  10. मां कभी स्कुल नही गई पर अखबार पढती है,रे रब्बीश कौन जात हो?

  11. मजा आ गया भाई। बहुत सही लिखे हैं।

  12. भैय्या जी बहुते बढिया लिखे हैं एकदम दिल खुश कर दिए।

  13. रवीश का दोनो गाल लाल कर दिये आप तो पॉईंट मार मारके. अब रवीश को एक काला बुरखा भी गिफ्ट दिजीयेगा. अब वो किसीको मुंह दिखानेके काबील ना रहा.

  14. लिखने में तो आप रवीश के भी बाप निकले.बस गलती ये है कि सेकुलर नहीं हो वर्ना किसी चैनल में मोटी तनखा और साथ में १० जनपथ का मोटा माल और गुलाम फाई का छिपा मुरब्बा भी खाते! गुड शॉट बॉस!‍‍

  15. भैयाजी,हमने तो ndtv देखना ही बंद कर दिया। किसी को बोलने ही नहीं देते,अपनी बात थोपे जाते हैं। सही हो तो मान भी लें लेकिन हमेशा एक पक्षीय व पूर्वाग्रही और कुंठित मानसिकता। लगता है राजनीतिक भाषण दे रहे हैं। अब छोड़ो भी,कोई भाव नही दे रहा उन्हें।

  16. Asal me hmare desh me avyavastha faila k log jyada shohrat paa lete h.. Aur aise logo ki kami bhi nhi yaha jo taraju le k baithte h.. Kisiko bhi accha bna denge kisiko bhi bura sab shabdo ka khel khel rahe.. Aur fayda sabko apna-apna hi dekhna h.. Aur multicolour logo me ache log ponds powder jitne chikna ho jate h dhar khatam kar deti h..chqpluuso ki duniya..ab ravish ji ko hi lijie akhir me ye bhi kisi desh bhakt party k ho lenge 🙂 ek aur bhala manas rajniti me aa jaega..kon jaat ho puchne k liye..

  17. Response(not reply )of a Ravish fan to a Bhakt who says Ravish “A Dalaal”.
    Pichhle kuchh samay se ek cheez ka anubhav kiya hai ki jab ham kehte hain ki ye banda logical hai ya phir Gajab ka likhta hai to ham ek tarah se ye mulyankan is bat par karte hain ki uski soch aur lekhni hamare vichardhara aur neta se mel kha rahi hai ki nhi.Yahi vastavik logic hai.Ravish ko sunna aur dekhna achha lagta hai isilye sayad mujhe apke kuchh tark illogical lage aur kuchh logical v the. Jaisa ki aapke letter ka sheershak hai “From a bhakt to Dalaal Ravish Kumar”. Mere v kuchh points hain.
    1. Kya aap sachmuch ye nhi mante ki sabhi parties ke IT Cell hain aur unme twitter par behisaab galiyan dene wale aur rumour failane walo ko badi sankhya me hire kiya gaya hai aur unme se bahuto ko Pradhanmantri aur Mantri khud follow karte hain. Aapko ya hamko kuchh galiyan achhi lag sakti hain ya ham ignore kar sakte hain aur jyadatar neta aur dusre journalists aisa kar v dete hain. Lekin jab Ravish twitter pe apna “Laprek” likh rahe ho ya koi photo daal raha ho to v galiyan din bhar barsaya jana kaise sahi hai aur wo kaise ise itni asaani se ignorekar de??Ravish to wo patrakar hai jisne sabse jyada Jan Kalyan k mudde TV par uthaye hain aur wo apne twitter handle par ise hi feedback v samajhta hai.Agar aap khud ko bhakt kehte hain ,to nischit rup se bhakton ne hi uska twitter par likhna band karwa diya.

    2. Baat jahan tak sautiya Daah ki hai to ye wahi MJ Akbar hain jinhone MODI ki Gujrat Dango ke mamle me jamkar khabar li thi. Nischit rup se Akbar sahib ne jarur vaicharik compromises kiye hi honge. Unhe to koi nhi gali deta .Ravish ka concern to yahi hai ki Akbar jinhone dono ghat ka pani pee liya ,unhe to koi Dalaal nhi keh raha to use kyun. Maine to Ravish ko Congress walo ko v latiyate hue dekha hai aur BJP walo ko v. Maine wo v debate dekhi hai jisme Sambit patra ke time par nhi pahuch pane par equilibrium maintain karne ke liye khud unki side se bolte dekha hai. Kya sach me lagta hai ki koi Paanch saal ek party me ,phir kuchh saal patrakarita me aur phir dusri party me jiski usne bhuri bhuri alochana ki hai usme chala gaya. Kya wo sachme neutral reh paya hoga. Ab Ravish ko gariyana isliye asaan hai kyunki he is easily available and He is zero rating. BTW,rating k liye kuchh logo ne do sal tak kafi mehnat ki hai PM ka interview pane k liye.Ab ye mat kahiyega ki wo interview v jenuine tha.
    3. Baat agar Ashish Khetan, Ashutosh ki hai to uske do reason hain.Pehli to ye ki wo dono ek newly formed party me gaye na ki un dono me jiski unhone pure time alochna ki thi.ye to pata hi hoga ki BABU BAJRANGI wala famous sting Ashish khetan ne khud hi kiya tha.Dusra reason ye v hai ki Ravish ko galiyan dene wale Bhakt hi jyada hain ,isliye usne unke hi naaw me sawaar us Admi ki pehchaan karai hai. Same yahi Rajeev Shukla aur Ashish ,Ashutosh ke saath hai.Agar koi AAPtard ya Khangressi(as called on social media ) use galiyan dega to he will point a finger towards them also.
    4. Jahan tak baat jaat ki hai .”Kaun jaat ho ?”
    India is a country where ,in most of the states ,caste equations are set to win and even cabinet reshuffle is done to set caste equations ,A PM is introduced as an OBC PM. While campaigning he tells the people that I am from a backward caste(10 May,2014 in Bihar),Lalu claims that Yadavas and Muslims won’t leave us , Mayawati’s whole politics is based on Dalit votes ,In every state there is this thing. And the most ironic thing is this that when A RAVISH Kumar, a well known reporter ,who has not got any political favour ,while reporting an election rally asks a person”Kaun Jaat ho ?” ,it becomes a favourite Bhakt Sarcasm. He does so ,in order to test the nerve of the public which votes on the basis of caste and creed and religion. If you want him to be a messenger of truth and an awareness champion ,he has done this and he does this through his programs many times. Really ,I don’t find any wrong in asking that.
    Bas itna hi kehna hai.Baki jo hai so Haiye hai

  18. पढ़ के मजा आया अभिनव जी. अच्छा है. आप इतना लिखे हैं तो हमारा फ़र्ज़ है कि हम अपनी समझ के हिसाब से बताएं भी आपको. सबसे पहले तो ये कि आप ठीक से समझ नहीं पाए शीर्षक को. इसलिए आपको आखिर वाले पैराग्राफ में जाना चाहिए. मैंने ‘दलाल’ और ‘भक्त’ दोनों को परिभाषित किया है और उसी हिसाब से कैप्शन लिखा है न कि खुद को ‘भक्त’ और उनको ‘ दलाल’ कहा है.
    1. जहाँ तक आईटी सेल की बात है तो इसमें कांग्रेस पिछड़ी हुई है. बाकी दोनों पार्टियाँ बराबर की टक्कर की हैं. गालियाँ देने वाले हर जगह गलियों में मिल जाते हैं किसी को भी कही भी दे सकते है. उन्हें इग्नोर करो या लात मारो. ये बात हमने रवीश जी को भी लिखी है. सरदाना और चौधरी को कम गाली मिलती है क्या दूसरी साइड से.
    2. मोदी के समय में दंगा हुआ गुजरात में. वो इन्वोल्व थे या नहीं, ये एक अलग विषय है पर एक मुख्यमंत्री के नाते उनकी जिम्मेदारी थी. अकबर ने मुख्यमंत्री की खबर ली. पत्रकार थे. अब आईडिया बीजेपी का पसंद तो उधर निकल लिए. जहाँ तक रवीश के सबको लतियाने का है तो आप फिर मिस कर गए कि यही बात मैंने भी लिखी है, हां एक शिकायत जरूर की है कि आजकल थोड़ा लतियाना एक तरफ़ा ज्यादा है.
    3. आशुतोष जिस नयी पार्टी में गए वो पार्टी उस समय अस्तित्व में थी जब वो IBN के संपादक थे और उसी कुर्सी पर बैठ-कर उनके लिए काम करते थे. आपको पता हो न हो पर आशुतोष ने आप तब ज्वाइन की थी जब उनकी व्यक्तिगत तस्वीरें आप ऑफिस और नेताओं के साथ पब्लिश हो गयी थी.
    4. व्यंग्य लिखता हूँ भैया. जो मौका देगा उसपर लिखेंगे. जुमला पर भी लिखते हैं, खांसी पर भी. कौन जात पर भी लिख सकते हैं.

    रवीश आज भी एक बेहतरीन एंकर हैं और उनकी रिपोर्ट काबिले-तारीफ है पर आजकल थोड़े विचलित हैं. पत्रकारिता में जब भी विचारधारा और मालिकों का हस्तक्षेप बढ़ता है तो ऐसा होता है.

  19. Bahut bahut Dhanyawad aapka reply karne ke liye ,sir. Phir se karenge to bahut achha lagega .Title ko mai misconstrued kar gaya tha .Ab samajh aa gaya. Phir v kuchh cross queries hain .Pointwise hi rehte hain.

    1.Ravish ye jante jarur hain ki ye IT Cell ka kaam hai. But bhavuk jyada hain.Isi wajah se twitter chhod v diya. Sardana aur Chaudhari kuchh jyada hi mukhar hain right wing ki taraf. Aur unka letter v padha tha . Usme wo Kiran Bedi wale interview ko daudate hue aur Kejriwal ko sahlate hue ,aisa likhte hain.

    2.Exactly same thing ,mai v keh raha tha. Ye ek clarification ho sakta hai jo apne likha hai. Lekin jab ek patrakar kisi Dange se related apni raay banata hai aur uspar itna mukhar ho kar likhta hai to nischit hi wo khud kam se kam shat pratishat santusht rehta hai . Yahi mai keh raha hu ki aisa karne me unhone vaicharik compromises jarur kiye honge. Ravish v yahi keh rahe hain ki itna compromise karne k bad v unko koi gali nhi de raha and he is being awarded with a ministerial post . Phir use Dalaali k liye gali akele kyun di ja rahi hai. Ye nischit rup se Sautiya Dah(Bada mazedar use kiya hai sir aapne) nhi hai .He is using Akbar kyunki Akbar us naav k hi sawari hain jo log unhe gali dete hain.

    3 Ashutosh ne to reporting v Topi pehen k ki thi 2011 me and everyone knew that he was inclined towards them, Baad me formally join v kar liya .Waise letter unko v likha ja sakta hai ,par point phir wahi hai ki AAP ki oar se koi attack hota nhi hai isiliye aisa karta hai. Aur Ravish kisi ko v latiya sakta hai apni sarcastic smile de dekar. Kisi din hatthe chadh gaye to unko v mil jayega jawab.

    4 Vyangya apka adhikar hai .Sabhi padhta v hoon main . Kewal bekar tab lagta hai jab log usko counter k form me dene lagte hain.

    Phir v Sir ,lekin ye sautiya Daah to nhi hi tha 🙂

  20. चौधरी जी… बहुत ही अच्छे से समझाया है रवीश कुमार जी को। काफी दिन से इसके प्यासे थे बेचारे।

  21. बहुत ही उम्दा जवाब दिया है आपने नवीन जी। दर-असल आज समाचार निर्माता खुलकर अपनी राजनैतिक पसंद को बढ़ावा दे रहे है।यह साफ़ साफ़ जनता को दिखाई देता है, फिर इनका क्या है, कुछ करोडो मिल जायेंगे, अगली पीढ़ी का इंतेजाम हो जायेगा, बाकी देश जाये खड्डे में।

    आप सही लपेटे है, ऐसे ही ज्यादा से ज्यादा लोगो को आगे आ कर ऐसे लोगो को लपेटना होगा।

  22. आजकल जात पंडित लोग को ही छुपाना पड़ता है। जाने कौन मनुवादी कह दे।

  23. Good marketing attempt .
    Continue..
    Instead of gaining of TRP , pl adopt only one circle of your society and improve traffic related problem .
    Regards

    It is not only for you , it’s fo all , for me also.
    Don’t find mistake in drawing , let’s draw as perfect what to want.

  24. बड्ड नीक भैया …… मोन गद् गद् भs गेल पैढ़ कs …..👌👌👌😂😂😂

  25. Kitne saal ke ho Naveenji?
    Lagta he sage bhi kutch achcha padhne ko milega. Badhai.
    I am also an purana Ravish fan

  26. रविश एक सुलझे और अच्छे शब्दकोश के पत्रकार हैं,लेकिन अफ़सोस आजकल वे पता नहीं क्यों,दिशाविहीन हो गए हैं। कारण, शायद वे महत्वाकांछी हो चले हैं इसलिए,उनका पैनापन अब भोथरा सा लगता है…कितना अच्छा होता वे उसी सादगी से अपनी विधा से जुड़े रहते। एम् जे अकबर साहब देश भक्त हैं,यह उन्होंने अनेक बार अपनी लेखनी और विचारधारा से प्रकट किया है…उन्हें जो सम्मान या दायित्व मिला है,उसके वह वाजिब हक़दार हैं !
    वैसे अपने बड़े ही (बिहारी) स्टाइल से अच्छा व्यंग किया है जिसके लिए बधाई के पात्र हैं…!

  27. ठेठ बिहारी पढ़कर आनंद आ गया और जो चुटीले व्यंग में आपने रबिश को लैटर लिखा हैं| आशा है अगर वो पढ़े और आत्मावलोकन करें तो वापस पत्रकारिता की ओर लौट आएंगे|

  28. नवीन जी 4-5 टा ऐहने शॉट खेलैत पङत लगातार… रवीश कुमार खिसिया लागल आय कैल!

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