April 24, 2010 | In: My Take

दर्द है या IPL

Written by Naveen Choudhary on April 24, 2010 – 7:18 am -

कमर दर्द बनाम IPL

 

पिछले हफ्ते सुबह – २ आँख खुली तो महसूस हुआ की कमर में काफी तेज दर्द है. उठने की कोशिश की तो उसी तरह वापस बिस्तर पर गिर गया जैसे किंग्स इलेवेन की टीम हर मैच के बाद धराशायी होती है.

दर्द पिछले कुछ सालो से था. मैं इस दर्द को उसी तरह नज़रअंदाज़ करता रहा जिस तरह हमारे मंत्री लोग पिछले 3 साल से IPL में हो रही धांधली को नज़रअंदाज़ करते आ रहे थे. पर आज दर्द एकदम से ऐसे उभरा जैसे IPL का घोटाला.

ने भी मोदी और थरूर की तरह ट्विटर पर तो नहीं पर अपने फेसबुक पर मोबाइल के जरिये अपडेट कर दिया की आज कमर दर्द के कारण मै छुट्टी पर हू. मेरा दोस्त अनुराग भटेजा इस मेसेज को पढते ही तुरंत उसी तरह हरकत में आया जैसे आजकल आयकर विभाग IPL घोटाले के बाद आया हुआ है. अनुराग ने मेसेज किया “भैया कितनी बार कहा है डॉक्टर को दिखाओ, अब आपकी नहीं सुननी मुझे. मै आ रहा हू, डॉक्टर के पास चल रहे है.”

मुसीबत ये थी की मै घर में अकेला था. हमेशा अच्छे बुरे काम में साथ रहने वाला दोस्त सफ़दर 3 दिनों के लिए दिल्ली गया हुआ था. मुझे लग रहा था की मै ललित मोदी हू और सफ़दर शरद पवार, जो हमेशा मेरे साथ होता था, पर जब मुसीबत आई तब अकेला छोड़ गया. ऊपर से तुर्रा ये की मेरी धर्मपत्नी भी उन दिनों जयपुर में थी. खैर सफ़दर को क्या दोष दू, जिस तरह पवार साहब की राजनैतिक मजबूरी है, सफ़दर की भी व्यावसायिक मजबूरी थी. इस माहौल में अनुराग की बात सुनकर मुझमे एक आशा का संचार हुआ की कोई तो है.

खैर जनाब, हिम्मत जुटा कर जैसे तैसे उठा और तैयार हुआ. अनुराग आया और मुझे सहारा देकर नीचे ले गया. मैंने अनुराग को कहा कि मै कार नहीं चला पाउँगा, तुम चलाओ. अनुराग ने बड़ी दयनीयता के साथ पूछा – “आप कार नहीं चला पाओगे? मुझे कार नहीं चलानी आती.” उस समय अनुराग की शक्ल पर एक आम हिन्दुस्तानी जैसी दयनीयता थी जो चाहता है कि देश में सब कुछ ठीक तरीके से हो पर वो लाचार चाह कर भी कुछ कर नहीं सकता था. उसने तुरंत जुगाड लगाया कि टेक्सी मंगाते है पर मै बेसब्र था, और इन्तेज़ार नहीं कर सकता था इसलिए कहा, मै खुद गाड़ी चलाऊंगा. चलो.

हम डॉक्टर के पास पहुचे. डॉक्टर ने पीठ पर हाथ लगाया और कहा कि बॉस आप बहुत बड़ी परेशानी में हो. आपको स्लिप डिस्क है. आपको जो दवाई दे रहा हू, खाओ. बिस्तर पर ही रहो, सिर्फ बाथरूम जाने के लिए उठो. कल सुबह फिर आना तब हम बाकि के जांच करेंगे. ऐसा लगा जैसे मै हिन्दुस्तान की किसी कोर्ट में आया हू, जहाँ आज सारे गवाह मौजूद होने के बावजूद सिर्फ फाइल पेश की गई है और जज साहब ने आगे की तारीख दे दी है.

भगवान भला करे दोस्तों का, जो कम से कम राजनीतिज्ञों की तरह साथ नहीं छोड़ते. दिन का खाना अनुराग घर से ले आया और शाम को निविदा और दीपिका घर आकर खाना बना गए. मैंने घर पर फोन किया और बीवी को बुला लिया. पिताजी ने कहा कि वो भी आ रहे है  

अगले दिन मै फिर से कोर्ट में, मतलब डॉक्टर साहब के पास पेश हुआ. डॉक्टर साहब ने कहा तुरंत एक्स-रे करवाइए, मैंने कहा कल क्या ग्रहण लगा था जो कल नहीं करवाया? इसके बाद डॉक्टर साहब ने कहा की अब मै आपके खून का सेम्पल लूँगा और देखना ये पक्का ठीक नहीं होगा. जैसे ही डॉक्टर ने खून का सेम्पल लिया मेरे तो होश उड़ गए. खून का रंग लाल से बदल कर काला हो चुका था, फिर सोचा बेहतर है, हमारे नेताओ का खून तो सफ़ेद हो चुका है. डर तब लगा जब देखा खून में क्लोटिंग भी हो गयी है. एक बार लगा कि कही अनुराग ने भी तो डॉक्टर के साथ कोई फिक्सिंग तो नही कि. इसीलिए इसने कल सिर्फ दवा दी, जांच नहीं कि और आज इसे पहले से पता है कि खून काला होगा. पर डॉक्टर भगवान होता है ये सोचकर इस शक को दफना दिया.  

शाम को डॉक्टर के पास पिताजी और बीवी के साथ फिर डॉक्टर साहब के पास गया. उन्होंने रिपोर्ट सामने रखी और मेरी बीवी को पूर्णा पटेल या सुनंदा पुष्कर समझ कर उस पर मेरी गलतियों/लापरवाहियों के तमाम आरोप उस पर जड़ दिए कि आप इनकी सेहत का ख्याल नहीं रखती, आप इनके खाने पीने का ध्यान नहीं रखती. देखिये इनकी क्या हालत हो गयी है.

डॉक्टर ने सारी समस्याओं के बारे उसी तरह एक-एक करके बताना शुरू किया जैसे हर रोज IPL का एक नया घोटाला हमें बताया जा रहा है.  डॉक्टर ने कहा – नवीन जी आपकी, रीढ़ की हड्डी बढ़ने लगी है, कोलेस्ट्रोल 80 -85 होना चाहिए बढ़ कर 325 पर है. यूरिक एसिड बढ़ गया है, इससे हड्डिया कमजोर हो रही है. हिमोग्लोबिन कम है, फेटी लीवर है. भाई आप खड़े कैसे हो? चल कैसे रहे हो? इन हालात में तो कभी भी जोंडिस, हार्ट अटेक हो सकता है. मैंने कहा डॉक्टर साहब मै एक हिन्दुस्तानी हू. जिस तरह मेरा देश तमाम घोटाले, भ्रष्टाचार, जातिवाद, घुसपैठ जैसी समस्याओ के बावजूद चल रहा है, उसी तरह मै भी चला जा रहा हू.

डॉक्टर साहब ने कहा, देखो जी आप अखबार वाले हो इसलिए ऐसी बाते कर रहे हो. मै तो आपको बता दू, की ये कमर दर्द सिर्फ एक चेतावनी है, अभी ना चेते तो कल को कुछ भी हो सकता है. बस अपने खाने पीने का ध्यान रखो, और 6 महीने में आप फिट हो जाओगे.

हमारे को भी बहुत चेतावनियाँ मिली है, कभी संसद हमले के रूप में तो कभी ताज हमले के रूप में, कभी रक्षा घोटाले के रूप में तो कभी IPL घोटाले के रूप में. क्या करे हम देशवासी? सोते रहे या जाग जाये? मैंने तो अपने शरीर की सुरक्षा के लिए सभी व्यसन छोड़ दिए है, शराब या मांसाहार को अपने जीवन से बाहर निकाल दिया है. क्या हम अपने देश की संप्रभुता के लिए इन भ्रष्ट लोगो को सिस्टम से बाहर नहीं निकाल सकते?

सोचिये मत अब वक्त है जागने का, इससे पहले की और देर हो जाये.

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6 Responses to दर्द है या IPL

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Anurag Bhateja

April 24th, 2010 at 7:30 am

hmm to ek hindustani ka sharir bhi hindustan hoke reh gaya hai… dard se bhara avan majboor…

good one bhai :)

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AS Raghuanth

April 24th, 2010 at 9:12 am

अपने दर्दों को IPL घोटालों की हंसी फुहारों में न उडाओ. तन को तान कर रहो, मन को बाँध कर. स्वास्थ ठीक रखो, वर्जिश करो, पांच मील की दौड़ लगाओ, अनुराग को लेकर और खाना ‘पीना’ ठीक रखो.

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Jitu

April 24th, 2010 at 9:20 am

Aapke shareer ko taqleef hui… zor ka jhatka zor se lagaa…. tab jaa ke aap saavdhaan hue hain.

Hamaare desh ( samporn desh… a nation as a whole) ko bhii jab zor ka jhatka zor se lagega… tabhi ye desh bhii saavdhaan hoga.

Aap ki tarah is desh kii bhii reed kii haddi( indifference) badh rahi hai…. uska cholestrol ( curroption) badh raha hai. Hemoglobin( responsibility ) thodi kam hai. Aur haddiyan( poora social structure) thoda kamzor hai.

Ye saare ml kar kisi din zor kaa jhatka deingey… fir apna desh bhii sab vyasanon se door ho… health ke raaste chalega. :)

Aap jald theek ho jayiye…. Take Care!! :)

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Munna

April 24th, 2010 at 9:34 am

Shikayatein aapki abhi bhi milti rahti hain mujhe.

Agar thodi si bhi gadbad ki to dekh lena, aa jaunga wahan and jeena mushkil kar dunga.

IC

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safdar

April 24th, 2010 at 11:15 am

shriman naveen ji dhanyawad k aap ne hamari tulna sharad pawar se kari, isse hamari dosti aur bhi mazboot ho gayi… Aur is baat ka bhi dhanyawad k aap ne bhabi k wapas aane k baad k kathano ki vyakha yahan nahi kiya…. Shriman anurag ji ka bhi dhanyawad k hamari anupasthiti mae unhone dosti ka purn fraz nibhaya… Baki zindagi zindadili ka naam hai, murda dil kya khaak jiya karte hai….. So enjoy lyf but Play safe….!!!!

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Deepika

April 24th, 2010 at 6:51 pm

hmmmm hence proved that u are a silent observer..
hmmmmmm well bus aaap apne khane peene ka dhayan rakhen…. woh khete nai…. all is well

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