बड़ा दुश्मन कौन – ठाकरे या पाकिस्तान?

पहले मनसे द्वारा उत्तर भारतीयों पर हमला, और अब बाल ठाकरे द्वारा सचिन पर शाब्दिक हमले. अभी ए न्यूज़ वेबसाईट पर पढ़ा की मनोज तिवारी के घर पर रात को पत्थर  फेंके गए और काईनेटिक इंजीनियरिंग के प्रमुख को धमकी दी गयी…

अपने वोट बैंक की खातिर ये दोनों ठाकरे कब तक देश की  अखंडता और  एकता पर हमले करते रहेंगे. कभी इन्होने सोचा है की जिन लोगो पर इन्होने हमले किये उन्होंने मुंबई को क्या दिया और इन्होने क्या दिया सिवाय गुंडागर्दी के.

पाकिस्तान के ISI और ठाकरे बंधुओ की सेना में फर्क ही कितना है? उन्होंने देश के बाहर बैठ कर हमारे लोगो पर हमला किया और जहा मौका पड़ा वहाँ हिन्दू मुस्लिम विवाद पैदा करके एकता को भंग करने की कोशिश की. और इन ठाकरे बंधुओ ने यही काम मुंबई में बैठकर किया. उन्होंने तो फिर भी ये सब अपने देश के फायदे के लिए किया, पर इन्होने तो देशवासियों को राज्य के नाम पर लड़ाकर अपने फायदे के लिए किया.

पाकिस्तान तो हमसे कश्मीर चाहता है, पर ये क्या चाहते है. खुद को राष्ट्रवादी कहने वाला ये बूढा दंतविहीन नखविहीन शेर  क्या महाराष्ट्र को भी एक  अलग देश के रूप् में देखना चाहता है.

पाकिस्तान के खिलाफ तो हम फिर भी लड़ लेंगे पर इन देशद्रोहियो से कैसे लड़ेगे?

भारतीयों को सोचना पड़ेगा की बड़ा दुश्मन कौन? पाकिस्तान या ठाकरे परिवार.

Deshdrohi

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6 thoughts on “Deshdrohi

  1. Why just ran inyto basements…

    Ask one Marathi manus with a little bit of “Jigar” to start a Infosys or a Wipro or a Reliance.

    All these organisations were started by non-Marathi Manus.

    If the NON-MARATHI-MAnus…wind up there shops and move back to their home states… Maharashtra would be down in the dumps.

    And what about employment…. how many of thse marathi manus can really do what our bhaiyyas can do… carpentery, electricians, masons, potters, washermen, fruitsellers….

    Nothing!!

    All they do is vadalism.

    Apnein ko “tiger” kehnein waale ye kesaria paushaakdhaari…. chuhe hain… jo baarish /aapatti aanein par bil mein ghus jaate hain.

  2. Ek kahaawat hai Naveenji… kaunsi bhaasha/culture mein hai… yaad nahin…

    ” buzdil kutte ghar ki chaar diwaari mein mehfooz… zaroorat se zyaada bhauk tein hain. Sherdil ko bhaunknein se kyaa lena. Woh toh khuli jungle mein shikaar karrte hain. ”

    Tabhi ye Shiv sena ke sher… Mumbai attacks ke samay apnein bil mein chupp ke baithe the.

  3. we must not think of such people who damage INDIA for their personal interest, lets be strong n behave like youngistan… we need positive & better india not these rotten eggs….. proud to b INDIAN…..!!!! Jai Hind….

  4. Thakre 1 deemak ki tarah hai,jo dheere -dheere is desh mein apna samrajya failakar maharashtra par ek chhatra rajya karna chahata hai shayad uske baad is desh par bhi. Aapas sabhi ko ladwa kr videshi neeti apna raha hai.
    inse ladne ke liye hum deshwasiyon ko ekjut hona hoga,sabse pahle un yuwaaon ko samjhana hoga jo thakre jaise logon ko khuda mante hain ki Ye desh DHARMNIRPEKSH tha, hai,aur rahega . jis tarah alag alag angon se milkar sahreer banta hai,usi tarah U.P.,Bihar,Bangal ,Maharashtra,etc. se milkar BHARAT bana hai , iske tukare karne ka adhikar kisi ko nahi.

  5. सत्ता पर काबिज होना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि सत्ता में बने रहना !
    और इसके लिए आवश्यक है चर्चा में बने रहना ! ये हथकंडा इससे बढ़कर और कुछ भी नहीं .
    क्षेत्रवाद और जातिवाद जैसे संकीर्ण मुद्दों पर राजनीति करने वाले तो आलोचना के लायक हैं ही लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश में
    आम मतदाता को इन मुद्दों से ऊपर उठाना होगा.
    स्वाभाविक है इन मुद्दों का अस्तित्व तभी तक है जब तक हम इन्हें तवज्जो दे रहे हैं
    अंतरिम रूप से ये लोग सफल भी हैं क्यूंकि ये चाहते हैं इन पर चर्चा हो और हम कर भी रहे हैं .
    आलोचना भी एक पब्लिसिटी ही है भले ही नेगेटिव

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