माननीय मुख्यमंत्री जी

मैं एक आम आदमी हूँ जो अपने छोटे से परिवार जिसमें पत्नी और बेटा शामिल है उनके साथ आपके सुशासित राज्य में रहता हूँ| आपसे निवेदन है की मेरे इस पत्र को इसलिए मत ख़ारिज कर दीजियेगा क्योंकि मैं बाहर के किसी राज्य से यहाँ आकर नौकरी कर रहा हूँ, जिन्होंने आपके अनुसार दिल्ली की व्यवस्था बिगाड़ रखी है| ये अलग विषय है की मेरा और मेरे जानने वालों का मानना है आपकी प्रजाति के लोग जिन्हें हम नेता/वी.आई.पी. कहते है उन्होंने इस शहर की व्यवस्था बिगाड़ रखी है|

खैर पत्र का विषय ये नहीं है| अब मेरा बेटा 4 साल का होने वाला है, और मेरे माता पिता कहते है की बस एक बेटी और हो जाये तेरी, तो परिवार पूरा हो जाये| मेरे कुछ मित्र जिनकी बेटियाँ है वो सब कहते है बेटी के आने से जिंदगी जन्नत बन जाती है| बेटा साथ दे न दे, बेटी हमेशा माँ बाप का साथ देती है| मेरी कुछ महिला मित्र है वो सब भी कहती है की एक बेटी का होना न सिर्फ आपके परिवार की शोभा बढाता है बल्कि आपके बेटे को महिलाओं की इज्जत करना भी सिखाता है| अप्रत्यक्ष रूप से परिवार, मित्र सब मुझे कह रहे है की एक संतान मेरी और होनी चाहिए और अगर बेटी हो सोने पर सुहागा होगा|

सच कहूँ तो मुझे भी लगता है की मेरी एक बेटी भी हो| वो घर में किलकारियां भरे, ठुमक ठुमक के चले, मैं उसके लिए रंग बिरंगी फ्रॉक लाऊं, खूब सारे खिलौने लाऊं और उसे खूब पढ़ाऊं| जब राखी का त्यौहार आये तो वो मेरे बेटे को राखी बाँधे, और जैसा मेरे मित्र कहते है की एक बेटी के होने से आपका बेटा महिलाओं की इज्जत करना सीखता है, तो उम्मीद करता हूँ की उसके साथ होने से मेरा बेटा भी पुरुष से पहले एक इंसान बनेगा|

 मेरी पत्नी की इच्छा थी की हमारी पहली संतान बेटी होती पर विधाता ने बेटा दिया| कल आपके राज्य में हुई चलती बस में बलात्कार की घटना के बाद मैं और मेरी पत्नी सदमे अचंभित और व्याकुल है| आज हम दोनों को लगता है की अच्छा हुआ की हमारा बेटा है| अब हमें लगता है की क्या हमें वाकई सोचना चाहिए की हमारी दूसरी संतान बेटी हो? इस रावणराज्य में एक नादान का जन्म लेना सुरक्षित है? क्या हम उसे इसलिए जन्म दें की वो पैदा हो और किसी कुत्सित दिमाग वाले व्यक्ति का शिकार बने? क्या हम उसे इसलिए जन्म दें की वो घर से बाहर निकलने से पहले 4 बार सोचे?

उसे पैदा तो मैं कर दूँगा पर क्या उसे बेफिक्र होकर कह पाउँगा की जा बेटी, निडर होके बाहर जा, पढाई कर, नौकरी कर, जहाँ घूमना है घूम, मनचाहे कपडे पहन और अपनी जिंदगी जी क्योंकि अगर कोई बाहर तुझ पर बुरी नज़र डालेगा तो तेरी सुरक्षा को हमारी सरकार और पुलिस ने व्यवस्था कर रखी है| मैं क्या, कोई भी आम आदमी अपनी बेटी को आपकी सरकार और पुलिस के सहारे सुरक्षित महसूस कर पायेगा?

 माननीय मुख्यमंत्री जी मुझे नहीं पता की आपको कैसे कल रात नींद आई होगी, पर मेरी और मेरे जैसे आम नागरिकों की नींद आपके सुशासित राज्य में उड़ी हुई है| आज जितना मैं एक पुरुष होने पर शर्मिंदा हूँ उतना ही इस देश का नागरिक होने पर भी, जो अपनी पुलिस और सरकार पर इतना भी भरोसा नहीं कर सकता की एक बेटी को बेहिचक बाहर निकलने दे सके| आप खुद एक महिला है और आपके शासन में भी अगर महिलाओं के प्रति अगर पुलिस में संवेदनशीलता नहीं तो आपकी सरकार भी मेरे लिए शर्मिंदगी का विषय है| आज के हालात ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया है की मैं एक बेटी को जन्म दूँ या न दूँ|

ऐसा नहीं की ये घटना पहली बार हुई है, एक के बाद एक न जाने कितनी घटनाये हो गयी और आप अब तक चैन से सोती रही? मेरी परिचित महिलाएँ दिल्ली में नौकरी करने इसलिए नहीं आना चाहती क्योंकि उनको और उनके अभिभावकों को लगता है की दिल्ली उनकी बेटी के लिए सुरक्षित नहीं| क्या ये एक महिला मुख्यमंत्री के लिए शर्मिंदगी का विषय नहीं?

क्या आप सोच पा रही है कि जब वो लड़की ठीक होकर बाहर आएगी तो उसकी मानसिक हालत क्या होगी? जब भी कोई पुरुष उसके नजदीक से गुजरेगा तो उसकी आत्मा काँप उठेगी ये सोच कर कि कहीं वो उसकी अस्मिता पर हमला करने तो नहीं आ रहा|

मैं एक जिम्मेदार पिता होने के नाते ये तय करूँगा की मैं अपने बेटे को ऐसे संस्कार दूँ की वो न कभी किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार करे और न ही उसे होते देख आँख बंद करे, पर माननीया आप भी राज्य की प्रमुख की भूमिका तो निभाएँ| आपने तो पिछली बार की घटना के बाद बड़े आराम से कह दिया था की महिलाएं शाम 6.30 के बाद घर से निकलती ही क्यों है? मैडम हम आपकी तरह वी.आई.पी. तो नहीं जो हमारे घर बैठे सारे काम हो जाये| आप और आपके बेटी तो वी.आई.पी. है, हमारे खर्चे पर आपको ऐसी सुरक्षा मुहैया की हुई है की कोई आपको देख भी नहीं सकता| आप नहीं समझेंगी|

 जिस समय आप एक आम आदमी रसोई का बजट 600 रुपये में निपटा रही थी उस समय मेरी बीवी भरे बाज़ार के एक ए.टी.एम्. से 600/- रुपये निकाल कर लाने में घबरा रही थी| उसने पिछले 2 सालों में दिल्ली में इतनी महिलाओं से सम्बंधित अपराध देख लिए की उसे डर लगता है की वो पैसे लेकर निकले और उसके साथ अनहोनी न हो जाये| और ये हालत तब है जब उस ए.टी.एम्. से कुछ ही दूरी पर पुलिस के जवान रहते है| उसे उनपर अब भरोसा नहीं| यही मेरी बीवी एक अन्य राज्य में रात 9.30-10 बजे भी अपने ऑफिस से निकल के या फिल्म देख के बेफिक्र और सुरक्षित अपने घर पहुचती थी, पर आपके राज्य में घबराती है|

आपसे निवेदन है की आप भले ही 600 रुपये का राशन या अन्य राज्य के लोगों पर अतार्किक और असंवेदनशील बयान देती रहे पर कम से कम एक महिला होने के नाते महिलाओं से जुड़े सुरक्षा मुद्दे पर तो संवेदनशील होकर कुछ काम करे| कुछ तो ऐसा करे की मेरा दिल कह उठे की हाँ मुझे गर्व है की ये सरकार मैंने चुनी| मैं आपसे मांग करता हूँ की ऐसे घृणित काम के आरोपियों के लिए आप ऐसी सजा सुनिश्चित करें की उन्हें देख कर कोई भी अपराधी बलात्कार जैसी घटना को अंजाम देने से पहले 100 बार सोचे| और अगर आपसे न हो सके तो हमें बंदूके रखने की अनुमति दे दीजिए, हम लोग ही सुधर देंगे इनको|

संभव है की ये पत्र आपके मान सम्मान को ठेस पहुचाये तो आप इस पर कार्रवाई कर सकती है| कम से कम आप गर्व महसूस कर सकेंगी की अपराध करने वालों के खिलाफ आप कार्रवाई करें न करे पर उसके खिलाफ आवाज़ उठाने वालों पर तो करी|

भवदीय

एक आम दिल्ली वासी

pic courtsey: The Hindu, BCCL

ना आना इस देस लाडो

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11 thoughts on “ना आना इस देस लाडो

  1. Thanx Naveen Bhai for such a daring letter to your CM.. M also with you in same position… Now a dayz.. All VIP’s from Peon to PM… are in other world of this universe… They are VIP’s of our country but their thinking style and the working style, they are doing in any field of our Livelihood is such a beurocritic way that they are here to earn only Votes and VIPship.. Shame on us to elect these people for our safety and for our country to run…

    In every untoward incident against women… Our Police, Neta ji, Chutbhayia jii and So called Social Reformers blame only our Maa, Beti, Behan, Bhabi or Wife… Shame on these people and their admirers… 🙁

  2. Bahut badhiya likha aapne Naveen bhai..govt has to take the reponsibility!!
    And hope that they wl get to their tasks and you get us a khuskhabri soon:)
    Keep up ur writing!

  3. jinn logon nein poore desh, poore samaaj, poore aawaam ka balaatkaar kiya hua hai… unn netaaon se aapko kyaa ummeed hai Naveen ji??

    🙁

  4. Hamaare maananeeya mantriyon se koi ummeed rakhnein ke bajaiy mera ek sujhaav hai…

    Maananeey Hawas se leen rapist ji,

    Ham jaan tein hain kii aap haiwaan hai. Aap se aise ghinaonein kaam kiya bagair arahaa nahin jaata. Meri aapse bas ek vinati hai. Aapko balaatkaar karna hai… kijiye.. shauk se kijiye. Sheila dixit ka kijiye. Soniya gaandhi ka kijiye. Unki bahu, betiyon ka kijiye.

    Iss is aapko bhii faayda hoga aur desh ko bhii.

    Aapko jo kshanik aanaand milega. so toh milega hi… saath hi… hamaare neta jag jayeingey. Jab baat unpe aayegi… toh unke hosh thikaanein ayeingey. Fir hamaare desh mein vyavasthaa ka sudhaar honein ki kuch toh ummeed hogi.

    Maananeey rapist ji… please hamaare suggestion pe gaur kijiye.

    Savinay,
    Is desh ka bhalaa chaahnein waala ek nagrik.

  5. Aapka prayas bahut hi sarahniya hai kintu aap bhi jante hain ki ye patra mananiya mukhyamantri tak shayad hi pahuche aur pahuch bhi gaya toh woh padhen! lekin main aap ko badhai dena chahta hun ki aapne prayas toh kiya!

  6. Really very nice n true..written.
    I wish Our honble Chief Minister too should wake up altleast now just like me n others r.
    But after few days of this ho.. halla(publicity) every body will forget.. n same crimes will again happen like in past..n more criminals will born n live freely..
    http://meenakshi2012.blogspot.in

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