भ्रष्टाचार एक, फायदे अनेक

 

पिछले कुछ दिनों से कॉमन वेल्थ गेम्स की तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार की बड़ी खबरे आ रही है| मीडिया और सरकार दोनों दुविधा में है की क्या करे? मुद्दे को उठने दे या खेल हो जाने तक चुप रहे| मै पूछ रहा हू की ये दुविधा क्यों? ये तो होना ही था| जब हमारे नेता फौजियों के लिए खरीदे गए ताबूत में से ही पैसा खा जाते है तो इस बार तो इन गेम्स के नाम में ही वेल्थ है, पैसा खाना तो बनता है न|

कलमाड़ी जी कोई गलती नहीं है है| दरअसल वो कॉमन वेल्थ गेम्स का मतलब समझने में थोड़ी गलती कर गए| उनको लगा कि कॉमन वेल्थ गेम्स का मतलब है “आम आदमी के पैसो का खेल”| बस फिर तो वो क्या खेले कि सभी खिलाडियों को पीछे छोड़ दिया| मीडिया को तो उन्हें सम्मानित करना चाहिए उनके इस रिकॉर्ड और बहादुरी पर| देखिये कितनी बेशर्मी से वो अब भी कह रहे है कि कॉमन वेल्थ गेम्स का बॉस तो मै ही हू|

वैसे मुझे लगता है कि कलमाड़ी जी ने जो भी किया ठीक ही है| अब एक बात बताइए, आप चाहते है कि आपके नेता देश को प्रगति के रास्ते पर लाये, देश में समृधि बढाएं| हमारे एक संपादक जी कहते है कि जो रिपोर्टर खुद साईकिल पर आता है वो मर्सडीज कार के बारे में कैसे अच्छा लिख पायेगा? यही सिद्धांत इन नेताओ पर भी लागू होता है| अगर ये खुद ही समृद्ध नहीं होंगे तो समृधि के सही मायने नहीं समझ पायेंगे और देश का भला नहीं कर पायेंगे| बस इसीलिए ये लोग पहले अपने लिए पैसे कमा लेते है ताकि समझ सके कि आम आदमी को समृधि से क्या फायदा होगा|

सिर्फ इतना ही नहीं, अप्रत्यक्ष रूप से इस भ्रष्टाचार के माध्यम से ये देश का भला ही तो कर रहे है| कई समस्याओं का समाधान कर रहे है| अब सोचिये इतने पैसो का ये करेंगे क्या? उसको कही तो खर्च करेंगे ना? खर्च करेंगे तो अर्थव्यवस्था में सुधार ही होगा ना| अगर इनके पास भ्रष्टाचार से जोड़ा हुआ पैसा ना हो तो इनके बच्चे भी हमारी तरह पढ़ लिख कर नौकरी ढूंढते रहेंगे और बेरोजगारी की दर में वृद्धि करेंगे| अब इस भ्रष्टाचार के पैसे से कम से कम इनके बच्चों को रोजगार कि चिंता तो नहीं रहेगी| ये लोग तो अपना बिजनेस शुरू करेंगे इन पैसो से| जब ये लोग व्यवसाय करेंगे तो लोगो को नौकरी पर भी रखेंगे| देखिये दोतरफ़ा फायदा हुआ ना| एक तरफ इन्होने आम आदमी के बच्चों के लिए नौकरियों में जगह छोड़ दी और दूसरी तरफ व्यवसाय लगा कर लोगो को रोजगार भी दिया|

अब बताइये अब भी आपको शिकायत है हमारे नेताओ के पैसे खाने से? कितने दूरदर्शी है ये लोग और देश का कितना भला सोचते है| देश के भले के लिए बदनाम होकर भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते है|

मै तो कहता हू कि हमें भ्रष्टाचार को अब मान्यता देकर कानूनी बना देना चाहिए| एक बार ये प्रस्ताव सरकार पेश कर देगी तो हमारे नेता एक सुर में इसे ध्वनिमत से पास करवा देंगे जैसे हर बार अपने वेतन बढ़ोतरी को करते है| इसमें गलत कुछ भी नहीं है| अगर भ्रष्टाचार को मान्यता मिल जाये तो हमें इसके बहुत फायदे होंगे| हम सब को भ्रष्टाचार की इतनी आदत पड़ चुकी है कि हम खुद इसके बिना नहीं रह सकते|

ज़रा सोचिये कि आपने ट्रेफिक कानून तोडा जैसे कि मोबाइल पर बात करते हुए रेड लाइट क्रोस कर दी| अब अगर भ्रष्टाचार ना हुआ तो आपको इस चीज के लिए 2000-4000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है| लेकिन भ्रष्टाचार कि महिमा से आप मात्र 200-500 रुपये में छूट सकते है| अजी छूट क्या सकते है, छूटते ही है और फिर गालियाँ देते है कि पुलिस वाले भ्रष्ट है| लाइसेंस बनवाना, राशन कार्ड, गेस कनेक्शन, एडमिशन, जमीन जायदाद के मामले, वगैरा ऐसे कई रोजमर्रा के उदाहरण है जहाँ अगर भ्रष्टाचार ना हो तो आपका जीना दूभर हो जाये|

अब अगर भ्रष्टाचार को कानूनी मान्यता मिल जाये तो सोचिये कितना कुछ बदल जायेगा, सब कुछ कितना आसान होगा:

  • सबसे पहले तो आपको रिश्वत देने और लेने में आत्मग्लानि नहीं होगी|
  • रिश्वत के दाम तय हो जायेंगे| रेड लाइट क्रोस करने पर आपको 200 या 500 के लिए बहस नहीं करनी पड़ेगी| एक दाम होगा|
  • संसद में रिश्वत के बढते दामो पर चर्चा होगी|
  • महंगाई कि दर रिश्वत की कीमतों से मापी जायेगी|
  • राजनीतिक दल रिश्वत की रेट कम करवाने के लिए आंदोलन करेंगे| उनके चुनावी एजेंडा में रिश्वत कम करवाना भी मुद्दा होगा|
  • रिश्वत से मिला पैसा इन्वेस्ट किया जाएगा जिससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी|
  • अधिकारियों कि बीवियाँ किट्टी पार्टी में एक दूसरे को मिली रिश्वत के बारे में गोसिप नहीं करेंगी| इससे उनके बीच में मनमुटाव नहीं होंगे|
  • और सबसे बड़ा फायदा ये कि गरीबी खतम हो जायेगी| कैसे? अरे भाई, गरीब आदमी के पास रिश्वत देने को पैसे नहीं होंगे और वो खतम जायेगा| ना बचेगा गरीब, ना बचेगी गरीबी|

बताइये मिलनी चाहिए ना भ्रष्टाचार को कानूनी मान्यता| आइये हम सब हाथ मिलाए और भ्रष्टाचार को कानूनी बनवाये|

– जनहित में जारी

 

भ्रष्टाचार एक, फायदे अनेक

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5 thoughts on “भ्रष्टाचार एक, फायदे अनेक

  1. janhit mei jaari , sahi hai naveen sir taarif toh bnati hi hai , atti utam…lage raho naveen sir kaamyaabi ki seediyaa chadhte rahoo bhaut uunda sach mei…

  2. कामन वेल्थ का अर्थ ही है वह वेल्थ जो कमानर्स (commoners) का है. जो कामन है वह नेता का भी है.
    कंट्री का जी.डी.पी. और सेंसेक्स रिश्वत की बदौलत शाश्वत बन गया है. जरा भ्रष्टाचार को सरकार की आचार संहिता से निकाल के तो देखो, कंक्रीट पर टिका रियल एस्टेट कैसे गिरेगा, माईनिंग कैसे थम जायेगा, मैनुफक्चारिंग कैसे कमजोर हो जाएगा, सर्विसेज सेक्टर कैसे शिथिल हो जाएगी….! भ्रष्टाचार सरकारी आचार संहिता मूल आधार है, बढ़ते जी.डी.पी. का राज है. यह कामन मैन के इंटरेस्ट में है कि भ्रष्टाचार के मूल मंत्र में अपनी आस्था टिकाये रखे..

  3. Well said Mr.Naveen.ye sach hai ki हमे दुसरो पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबाँ मे झाँकना चाहिए।

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