July 29, 2010 | In: Affairs & Crushes
चाची
Written by Naveen Choudhary on July 29, 2010 – 11:42 am -चाची
ये न तो कोई प्रेम कहानी है और न ही क्रश की कहानी. ये मजाक में शुरू हुई मजेदार घटना है, जिसका अंत उससे ज्यादा मजेदार रहा.
एम्.बी.ए. में एडमिशन लिया था. कॉलेज अगले दिन शुरू होना था और हम लोग एक दिन पहले पहुच गए ताकि हॉस्टल में अपने कमरे सेट कर सके और बाज़ार वगैरह घूम कर कुछ जरूरी चीजे भी खरीद ले.
हॉस्टल पहुच कर अपना सामान सेट किया और अडोस – पड़ोस में जान पहचान करने के उद्देश्य से बगल के कमरे में पंहुचा. पडोसी भी राजस्थान के ही थे तो बातचीत अच्छी होने लगी. थोड़ी देर में एक भटकती आत्मा जिसका नाम सौरभ था वो कमरे पंहुचा और ठेठ पुरबिया हिंदी टोन में बोला – भैया, सिगरेट रखे हो क्या? साला सिगरेटवा का पैकेट ही लेना भूल गए. इसी तरह हमारी सौरभ की जान-पहचान शुरू हुई. बहुत बड़ा बक** था वो. मुझे कहता है चौधरी साब, तोहार सकल जो है, उ हमार एक चाचा से मिलत है. तुमको हम चाचा ही बुलाएँगे. साथ के ही एक मित्र ने कहा की ये तो चौधरी भी है तो चाचा चौधरी हो गए. इसी तरह जान पहचान करते हुए दिन निकल गया.
रात को हमें आवाज़ लगायी गयी की सभी जूनियर्स छत पर पहुचो. रेगिंग का समय आ गया था. ऊपर पहुचे तो हमें बताया गया की ये रेगिंग नहीं पी.डी.पी. है अर्थात पर्सनलिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम. तो चलो अब सब लाइन से आओ और अपना नाम बताओ. मैंने भी बताया अपना नाम. पीछे से सौरभ बोल पड़ा – सर ये चाचा है. सीनियर्स ने इस पर खिचाई तो करी पर साथ में घोषणा की अब मुझे सब सिर्फ चाचा बुलाएँगे. इस तरह मेरा आधिकारिक निक नाम “चाचा” पड़ गया.
चाची की खोज
कॉलेज का पहला दिन. हमें गंजा करवा दिया गया था और हमें सर में सरसों का तेल लगा के कॉलेज जाना था. हमें लड़कियों से बात करने की भी मनाही थी. हम कॉलेज पहुचे तो हमें कांफेरेंस हॉल में बैठने को कहा गया. हॉल में एक भी लड़की नहीं थी. हमें बड़ा धक्का लगा. कॉलेज के प्रोस्पेक्टस में तो बहुत खूबसूरत लड़कियों की फोटो थी लाइब्रेरी में पढते हुए, कंप्यूटर लैब में बैठे हुए. यहाँ मैदान खाली. खैर ऊपर वाले ने सुनी और एक लड़की आई. 2 चोटियाँ बनाये हुए, सर में तेल चुपड़े हुए और सलवार सूट पहने हुए. बहुत ही गन्दी लग रही थी. हमने कहा चलो प्रोस्पेक्टस जैसी न सही पर लड़की आई तो. सारे लड़के अब दरवाजे की तरफ नज़र गडाये थे की अब कोई तो खूबसूरत सी लड़की आएगी. लड़कियाँ आने लगी और सब सलवार सूट में चोटी बनाये हुए. प्रोस्पेक्टस में लड़कियों के कपडे भी थोड़े तंग और छोटे थे, पर यहाँ सब कुछ उलट था. लडको को इन सब चीजों से सदमा लगा पर लड़के तो लड़के होते है. सब कुछ मिनटों में सदमे से बाहर आ गए.
अब शुरू हुआ हर लड़की के आने के साथ उसका परीक्षण जैसे की इसकी आँखे अच्छी है, इसकी चाल देख वगैरह वगैरह. इसके साथ ही कुछ लोगो ने जिसमे सौरभ भी था अपने लिए लड़कियाँ पसंद करनी भी शुरू कर दी. अब हर लड़की के दरवाजे से अंदर आने के साथ ही किसी न किसी की आवाज़ आती, ये वाली मेरी. कुछ लड़कियों के मामले में 2-2 लडको ने बोला की ये वाली मेरी. फिर आपस में मांडवाली कर लेते की चल अगली तू ले लियो, और एक – दो ने ये भी कहा की देख लेंगे किसकी होती है.
ये सब चल रहा था और मै चुपचाप बैठा सब देख सुन रहा था. मेरी आदत है की मै नयी जगह पर जल्दी बोलता नहीं लेकिन लोगो को ओब्जर्व करता रहता हू. सौरभ की कमीनी नज़र मुझ पर पड़ी और बोला की चाचा कौन सी वाली पसंद किये हो? मैंने कहा की भाई तुम बच्चे पसंद कर लो, हम तो उसी में खुश है. पीछे से कोई बोल पड़ा की चाचा की तो उम्र हो चली है, रहने दो. सौरभ पलट के उसे बोला की – चुप बे गां*, चाचा से तमीज से बात करो, चाचा ने शादी टाइम से कर ली होती तो तुम्हारी उम्र के बच्चे होते उसके. मै समझ नहीं पाया की ये मेरा समर्थन किया गया या मेरी टांग और खींची गयी.
सौरभ फिर बोला – बोलो चाचा कौन सी वाली? मैंने एक लड़की की तरफ इशारा किया तो सौरभ बोला की चाचा वो तुम्हारी बहू है, कोई और बताओ. मैंने कहा की सब अच्छी वाली बहू बन जाएँगी तो फिर हम किसे पसंद करे? सौरभ ने कहा की ठीक है, अब जो भी आएगी वो चाचा की होगी, कोई भी उसे नहीं देखेगा. मैंने कहा ठीक है और हम सब दरवाजे की तरफ टक लगा कर बैठ गए. अगले 5 मिनट कोई नहीं आई. सौरभ बोला लगता है चाचा कुवारे मरोगे. तभी दरवाजे पर एक लड़की आई और 6-7 लड़के एक साथ बोले ओए ये मेरी.. पर सौरभ की आवाज़ उन पर थोड़ी भारी थी की ओए ये चाची है. और वो लड़की सबकी चाची बन गयी, ये अलग बात है की उसे नहीं पता था की चाचा कौन है. मैंने उसे गौर से देखा, वो लड़की अब तक आई हुई सब लड़कियों में सबसे खूबसूरत थी. लड़कियों की भी रेगिंग के दौरान ड्रेस कोड थी जिसमे सब लड़कियाँ बुरी लग रही थी, लेकिन ये २ चोटियाँ बनाये, सर में तेल चुपड़े हुए भी काफी अच्छी लग रही थी. सौरभ फिर बोला – चाचा तुम्हारी तो लॉटरी लग गयी. बोलो पहले वाली से एक्सचेंज करते हो क्या? मैंने कहा – नहीं बेटा, बहू तो बहू है जो डिसाइड हो गया वो हो गया.
ये दिन था और उसके बाद हर रोज जब भी वो क्लास में आती तो लड़के चाची – चाची चिल्लाना शुरू कर देते. वो लखनऊ की रहने वाली थी और लखनऊ के करीब 25-26 बच्चे हमारे बैच में थे. रेगिंग अभी भी चल ही रही थी और लड़कियों से बात करने की मनाही जारी थी. फिर भी लखनऊ के कुछ लड़के मौका लगा कर उससे किसी न किसी बहाने बात करने की कोशिश करते ही रहते थे जैसे की अच्छा – अच्छा मेरा घर भी तो आपके घर के पास ही है, बस 10 किमी. दूर है. मै तो हजरतगंज की फलानी दूकान से ही कपडे लेता हू. इसी तरह की उल-जलूल बाते करके स्टाइल मारने की कोशिश किया करते थे.
जो भी लड़का बात करता दिखता उससे, उसकी हम लोग सीनियर्स की रेगिंग शुरू होने से पहले ही रेगिंग ले लेते थे, की साले समझाया था न की चाची है फिर भी बतिया रहे हो उससे. इस तरह मस्ती में रेगिंग का समय कट रहा था, लखनऊ के बहुत सारे लडको से दोस्ती भी हो गयी थी. इन्ही में से एक थे… नाम नहीं लूँगा, कह लीजिए की एक थे सिंह साहब. मै A सेक्शन में था और सिंह साहब B में. बहुत ही मस्त आदमी थे, थोड़े शायर किस्म के थे, थोड़े कहानीबाज़ थे. कुल मिला कर उनसे बतियाने में बड़ा मजा आता था. सिंह साहब ने कॉलेज में पहले दिन ज्वाइन नहीं किया था, वो कॉलेज शुरू होने के तीन दिन बाद आये थे, साथ ही वो हमारे सेक्शन में भी नहीं थे इस कारण चाची वाले प्रारंभिक एपिसोड से अनजान थे. कई बार हँसी मजाक के चाची नाम आता या हम उससे बात करने वाले लड़के की ले रहे होते थे तो सिंह साहब पूछा करते की जनाब ये चाची है क्या बला? हम भी मजे लेते हुए कहते कुछ न पूछो सिंह साहब. बस आपके शहर से प्यार हो गया है उसके कारण. आपको दिखाएँगे कभी. नाम मत पूछिए क्योकि चाची को नाम से नहीं बुलाते. हम लोग इस पर ठहाके मार लेते.
कुछ दिनों के बाद हमने कॉलेज में देखा की सिंह साहब भी चाची को साइड में ले जाकर कुछ बात कर रहे है. हमने कहा की आज सिंह साहब आपकी रेगिंग है. शाम को सिंह साहब हमारे कमरे में आये, इधर उधर की बातो के बाद मैंने कहा की सिंह साहब आप भी अपने लखनवी मित्रों की तरह हो गए और लखनऊ लखनऊ खेलने लगे. सिंह साहब बोले की समझा नहीं मै. मैंने कहा आज आप चाची को साइड में ले जाकर लखनऊ लखनऊ खेल रहे थे. सिंह साहब बोले की किससे भाई साहब? चाची है कौन? मैंने कहा वही जिससे आप कंप्यूटर लैब के साइड में बतिया रहे थे दिन में.. सिंह साहब बोले – वो जो हरे सूट में थी? मैंने कहा – जी हाँ, वही. सुनते ही सिंह साहब ठहाके मार कर हसने लगे. बोले की आप निश्चिन्त रहिये, मै आपके रास्ते में नहीं आने वाला कभी-भी. ये कह कर सिंह साहब फिर ठहाके मारने लगे, वो लड़की का नाम लेते फिर चाची बोलते और ठहाके मारने लगते. मैंने थोड़ा चौका- मैंने कहा सिंह साहब हुआ क्या? समझा तो दो. वो बोले कुछ नहीं, आप कोशिश करते रहिये. मैंने कहा की कुछ तो गडबड है, समझाओ. सिंह साहब हँसते रहे पर कुछ नहीं बोले. मैंने कहा चलो और कुछ न बताओ पर यही समझाओ की आप ने ये क्यों कहा की आपके रस्ते में मै कभी नहीं आऊंगा, आप कोशिश करते रहिये. सिंह साहब ने अपनी हँसी रोकी और कहा की मै उस लड़की को कई सालो से जानता हू, इसलिए उसके नाम के साथ चाची सुन कर हँसी आ गयी. मैंने पुछा – कैसे जानते हो? सिंह साहब ने कहा रहने दो, आप तो इतना समझ लो की मै आपके रास्ते में नहीं आऊंगा. मैंने बड़ी जिद की कि मुझे बताओ आप उसे कैसे जानते हो. आपको अपनी दोस्ती की कसम.. सिंह साहब बोले….
“नवीन भाई, वो मेरी दूर के रिश्ते की बहन है.”
कहानी खत्म.



12 Responses to चाची
Anurag Bhateja
July 29th, 2010 at 3:57 pm
ho gai KLPD
Rakesh Rai
July 29th, 2010 at 4:18 pm
bahut badhiya!! Keep it up..u write really well Naveen bhai.
Deepika
July 29th, 2010 at 5:09 pm
haaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
haaaaaaaaaaaaaaaaaaahaaaaaaaaaaaa
mazaaaaaa aaa gayaaa par kar rofl
Puneet Arora
July 29th, 2010 at 9:25 pm
very nice naveen sir …. u are a great writer ..
chandan
July 30th, 2010 at 4:37 am
Zabardast…..U made this friday a Good Friday wid this…
Parveen Jaggi
July 30th, 2010 at 7:08 am
Hahahahahaha………hahahaha…..hehehehe….
Bhai Chacha ji… Mazza aa gya aaj such mein… gud Friday ho gya…. Gud Luck fr nxt one…
Pushpa
August 2nd, 2010 at 5:00 pm
hmmmmm good one…but ye wali kahani to apne kabhi nai sunai mujhe…na jane kitne raaj dafnaye hai apne…
Rashmi keshri
October 7th, 2010 at 5:37 pm
पर क्या चाचाजी ने चाचीजी को ये राज बताया?. . . . . .eagery waitin 4 ur nxt postin.
Jayant D B
November 15th, 2010 at 12:48 am
Bohot Badiya!!! Mast Lekha hai!!!Majja aa gaya….
shivendra 'SINGH'
March 1st, 2011 at 1:57 pm
Gr8 brother . waise ye singh saab aaj kal kahan hain???
Jyoti Parkash Sharma
April 8th, 2011 at 4:53 pm
lkio
mukesh
May 5th, 2011 at 11:14 am
sahab, maza aa gaya , bas youn laga ki sab kuch face to face dekh rahen ho. apka andaza ye bayan wakai nirala hai.