Click here to read first part to know how I reached to Mysore. http://www.naveenchoudhary.com/mylife/cauvery-issue/

—————————————————————————————————————————————

Part 2

सुबह उठा तो एयरफोर्स का ट्रक खड़ा था. पता चला कि डारमेट्री में सोयी 70% जनता इसी इंटरव्यू के लिए आई है. वही लड़का फिर दिखा जिसने रात को मदद की थी. मैंने उसे कहा कि मुझे कुछ पैसे और उधार  दे दे ताकि मैं अपने घर पर फ़ोन करके पैसे मंगा सकूँ. अच्छा लड़का था, उसकी मदद से घर बात हुई, पापा ने कहा पैसे अकाउंट में जमा कर देंगे.

ट्रक हमें एयरफोर्स स्टेशन ले गया. वापस जाने का टिकट नहीं कराया था क्योंकि ये नहीं पता था कि उसी दिन जाना है या 5 दिन बाद. दरअसल पहले दिन में 3 राउंड टेस्ट होते हैं और हर राउंड के बाद छटनी होती है. तीसरे के बाद जो बचते हैं उन्हें अगले 3-5 दिन तक वहीँ रहकर बाकी के टेस्ट देने होते हैं.

मेरे तीनों राउंड निकल गए और अब मुझे अगले 3 दिन एयरफोर्स स्टेशन में रहना था. दिन भर अलग-अलग तरह के टेस्ट होते, शाम को मस्ती करता, नए दोस्त बनाये. जिस लड़के ने मदद की थी उसका नाम था अरुण. दिल्ली में ही रहता था तो उससे और अच्छी छन गयी. रिजल्ट आया तो सेलेक्शन नहीं हुआ. हम 155 लोग इंटरव्यू को पहुंचे थे जिसमें 3 राउंड की छटनी के बाद 25 बचे. आखिरी सेलेक्शन सिर्फ एक लड़के का हुआ. मुझे पता चला कि हमसे पहले वाले बैच में किसी का भी नहीं हुआ. एयरफोर्स वाले समझौता नहीं करते. जिसका हुआ, वो अलग नहीं था हमसे पर उसमें एक चीज जो हमसे अलग थी वो था उसका positive attitude. मैंने सीखा उससे ये और अपना attitude सुधारा. आज भी मदद मिलती है, पर उसके बारे में कभी और.

सबसे अच्छी चीज थी कि हम सबको आने-जाने का किराया एयरफोर्स ने दिया. मैंने पैसे मिलते ही अपने इस नए दोस्त अरुण को पैसे वापस किये. मुझे लगा था कि बस ये सब ख़तम हुआ पर कहानी सिर्फ इतनी नहीं है दोस्त. कावेरी का एक ही आशिक थोड़ी है कर्नाटक. दूसरे आशिक तमिलनाडु की एंट्री बाकी थी और उसे भी हमसे ही खुन्नस निकालनी थी.

मैं और अरुण वापस बैंगलोर पहुंचे तो रात हो गयी थी और रिजर्वेशन काउंटर सुबह खुलता. उस टाइम IRCTC जैसी सुविधा शायद नहीं थी या थी भी तो हमें इस्तेमाल नहीं पता था. हमने सामान डारमेट्री में टिकाया पर यहाँ पर चार्जेज 250 रुपये थे. दो बेड नहीं ले सकते थे तो एक ही लिया. हमें बोला गया कि एक बेड पर एक ही जन अन्दर जा सकता, दोनों नहीं. हमें ये महंगा लगा पर इससे सस्ता जुगाड़ और कोई था नहीं. मरता क्या न करता, आधी रात मैं सोया बेड पर आधी रात अरुण. बाकी टाइम प्लेटफार्म पर ट्रेन के डब्बे गिनते गुजरे.

सुबह हुई और हम स्टेशन पर 6 बजे जाकर बैठ गए. तत्काल के लिए तब ऐसे ही करना पड़ता था.  3 फॉर्म भर के दिए रेलवे काउंटर पे तो पता चला कि तीनों ट्रेन में टिकट नहीं है. तत्काल का एक ही आप्शन मिला और वो भी चेन्नई से. हमें एयरफोर्स से दोनों साइड के किराये के रुपये मिले थे पर इस नयी सिचुएशन ने थोडा मुश्किल कर दिया था क्योंकि एक तो तत्काल के पैसे ज्यादा, ऊपर से अब चेन्नई जाने का और रहने का एक्स्ट्रा खर्चा. उपाय तो था नहीं, अगले दिन का रिजर्वेशन कराया चेन्नई से दिल्ली तक. पता किया कि रात को बस निकलती है चेन्नई की. 6 घंटे में हम पहुँच जायेंगे. ट्रेन भी शाम को है और ज्यादा टाइम लेगी. हमने सामान लॉक किया और बाहर निकल पड़े एटीएम ढूँढने.

मेरे पास IDBI बैंक का अकाउंट था (जीरो बैलेंस पर वही मिला था उस टाइम) और उस ज़माने में पैसा सिर्फ अपने ही बैंक के एटीएम से निकाला जा सकता था. IDBI का बैंगलोर में हमें कोई एटीएम नहीं मिला आस-पास. सोचा चेन्नई जाके देखेंगे. हम इधर-उधर घूम के जब बस का टिकट करवाने पहुंचे तो पता लगा कि कल कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु बंद है. कोई बस कर्नाटक से नहीं जाएगी. हमारी हालत पस्त क्योंकि तत्काल करा चुके और पैसे थोड़े से बचे हैं. स्टेशन पहुचते पता लगा कि 10 मिनट में एक ट्रेन जा रही है और उसके बाद कोई ट्रेन चेन्नई नहीं जाएगी आज. मैं dormatory भागा सामान लेने और अरुण टिकट की लाइन में लगा. ट्रेन चलने को थी और अरुण चढ़ चुका था. मैं DDLJ की सिमरन की तरह भागा, बस फर्क इतना था की मेरे पास सामान था और हाथ बढ़ाये अरुण खड़ा था.

12027 Bangalore Chennai Shatabdi

जैसे तैसे चढ़ तो गए पर TTE ने हमारी लगा दी. जनरल का टिकट लेकर रिजर्वेशन बोगी में. ढंग से सो नहीं पाए थे पिछली रात तो हमें सीट चाहिए थी. हमने कहा – स्टूडेंट हैं सर, सीट दे दीजिये. जो हिंदुस्तान में होता है, वही हुआ. हमने उसे ऊपर से पैसे दिए और हमें उसने सोने को सीट दे दी. मेरे पास पैसे फिर ख़त्म हो चुके थे. अरुण के पास 100 रुपये बचे रह गए थे.

हम चेन्नई पहुंचे तो पता चला कि बहुत सी ट्रेन कैंसिल कर दी गयी है पर शुक्र है कि हमारी सिर्फ 12 घंटे लेट कर दी गयी थी. चेन्नई स्टेशन भरा हुआ था यात्रियों से. चलने और बैठने की जगह नहीं पर जो साफ़ सफाई का इंतजाम था वो काबिले-तारीफ था. अरुण कुछ खाने को लाया और हमने पता करना शुरू किया कि IDBI एटीएम कहाँ मिलेगा. सबसे नजदीकी एटीएम कोई 15 किमी दूर था. हम बाहर निकले पर कोई ऑटो जाने को राजी नहीं हुआ. हमने पुलिस से मदद मांगी तो उसने सलाह दी कि हम बाहर न जाएँ तो बेहतर. फिर भी हमारे कहने पर उसने एक ऑटो वाले को जाने को कहा. उसने 150 रुपये मांगे जो हमारे पास थे नहीं, और पुलिस वाले के हिसाब से इस बात की गारंटी नहीं थी एटीएम या एटीएम में पैसा आज वहां मिल ही जाएगी. इस माहौल में ऑटो के पैसे न देने की वजह से पिटाई खाने का आईडिया मुझे और अरुण को जंचा नहीं और हम वापस अन्दर आये.

शाम तक भूखे प्यासे बैठे रहे. रात 9 बजे ट्रेन चली. अरुण ने पार्ले-जी के 2 पैकेट रख लिए थे. इससे ज्यादा के पैसे न थे. अगले दो दिन का सफ़र हम दोनों का उसी पार्ले-जी पर चला. जब प्यास लगती तो स्टेशन आने का इंतजार करते और प्लेटफार्म पर उतर कर पानी पीते.

खैर ये सफ़र ज्यों-त्यों कटा और यादों में रह गया. ये तो था मेरा और कावेरी का क्रॉस-कनेक्शन पर एक बार फिर नौकरी के सिलसिले में कुछ महीने के लिए बैंगलोर आना पड़ा मुझे साल 2006 में.

इस बार मेरे साथ कावेरी कांड तो नहीं हुआ पर जो हुआ वो उससे भी ज्यादा भयंकर था. समझ नहीं आता आपको कहूँ या नहीं. आपका दिल दहल जायेगा मुझ पर जो बीती वो सुन कर. इस बार जो हुआ उसका खामियाजा मैं आज तक भुगत रहा हूँ. उस टाइम बहुत लोगों ने मदद की पर अब कोई नहीं कर सकता. पैसे इस कांड की वजह से कभी रहे ही नहीं मेरे पास. चलिए बता ही देता हूँ –

जयपुर में एक जानने वाले थे, उनकी मौसेरी बहन बैंगलोर में ही नौकरी करती थी. उन्होंने पापा से बात मेरा रिश्ता उससे पक्का करवा दिया और दो महीने बाद हमारी शादी भी हो गयी. ये दुखदायक घटनाक्रम भी बैंगलोर की वजह से ही हुआ. हाय बैंगलोर, कब मुझे छोड़ेगा!

 

 

मैं और कावेरी – Part 2

Post navigation


One thought on “मैं और कावेरी – Part 2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *