इंतज़ार और तेरा गुस्सा..

 

इंतज़ार एक ऐसी चीज है जो जिंदगी के साथ हमेशा जुडी रहती है, कभी खत्म नहीं होती| हमेशा किसी न किसी का या किसी बात के होने के हमें इंतज़ार रहता है|

बहुत से कवियों,लेखकों ने इंतज़ार को प्रेमिका के साथ जोड़ा है| उसके आने का इंतज़ार, उससे मिलने का इंतज़ार| मैंने भी अपनी जवानी के दिनों में ऐसे कई इंतज़ार किये है| ऑफिस खत्म होने का इंतज़ार, फिर उससे मिलने की जगह पर पहुचने का इंतज़ार और फिर उसका इंतज़ार| मुझे लगता था की इस इंतज़ार का जो मज़ा और व्यग्रता है वो किसी और में नहीं|

वक्त बदला और फिर इंतज़ार भी| पहले एम्.बी.ए. पूरा होने का इंतज़ार था, फिर नौकरी लगने का, फिर एक तारीख का ज्यादा इंतज़ार रहने लगा, फिर शादी होने का और यूँ ही समय के साथ इंतज़ार बदलता गया|

आज जिस इंतज़ार की बात कर रहा हू, वो अब तक के इंतज़ार में सबसे मीठा, सबसे प्यारा और व्यग्र करने वाला इंतज़ार है| इंतज़ार आज भी वैसा ही है, अब भी वैसे ही इंतज़ार रहता है उससे मिलने का| और वो इंतज़ार है शाम को आर्यादित्य से मिलने का इंतज़ार| पहले ऑफिस खत्म होने का इंतज़ार रहता था की जल्दी चले और उससे मिले, अब इंतज़ार रहता है की ऑफिस खत्म हो और इससे मिले| उससे जल्दी मिलना इसलिए भी जरूरी होता था की उसे रात 8 बजे से पहले घर पहुँचना होता था, पर इसे तो मेरे साथ ही रहना है, इसके बावजूद इससे मिलने की जो व्यग्रता रहती है वो पहले कभी नहीं हुई| कभी टूर पर जाऊँ तो टूर जल्दी से जल्दी खत्म होने का इंतज़ार होता है|

पर ऐसा नहीं की ये इंतज़ार सिर्फ मुझे रहता है| इतना ही इंतज़ार आर्यादित्य को भी रहता है| रोज सुबह वो बालकनी में खड़ा होकर बाई-बाई करता है और शाम को मेरे आने के समय पर वही रेलिंग पर लटका हुआ इंतज़ार करता रहता है| जैसे ही मुझे देखता है, पापा आ गए चिल्लाता हुआ घर का दरवाजा खोलने आ जाता है|

जिस दिन मुझे देर हो जाती है ऑफिस से आने में, तो बालकोनी में ही रहेगा, दरवाजा खोलने नहीं आएगा| अंदर आने के बाद जब मैं टोकूंगा तो जवाब देता है – चिनू गुच्चा (गुस्सा)|

सबसे ज्यादा गुस्सा देखने को मिलता है जब मैं टूर पर जाता हूँ| टूर के पहले दिन फोन पर बात करेगा और बोलेगा पापा आ जाओ| अगले दिन तक जब पापा नहीं आते तो फिर फोन पर बात करने से मना कर देता है| उसकी इस हरकत पर प्यार भी आता है और चिंता भी होती है की इतने से लड़के का इतना गुस्सा|

जब टूर से वापस आता हूँ तो वो अपना सारा गुस्सा भूल जाता है, दौड कर मुझसे लिपट जाता है और उसके बाद कम से कम 3-4 मिनट तक कुछ नहीं बोलता, सिर्फ छाती से चिपका रहता है| उसे अपने से लिपटाये हुए ही सामान रखता हूँ| वो पल कैसा होता है उसे मैं बयान नहीं कर सकता|

हम दोनों रोज एक दूसरे का इंतज़ार करते है, लेकिन गुस्सा सिर्फ वो होता है अगर उसके इंतज़ार की मियाद बढ़ जाये तो| उम्मीद है की उसका ये प्यार और गुस्सा हम लोगो के लिए हमारे बुढ़ापे तक ऐसा ही रहेगा|

इंतज़ार और तेरा गुस्सा..

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