मेरा आज्ञाकारी बेटा


 आर्यादित्य बड़ा हो रहा है, बातों को समझने लगा है|  भले ही तुतला के पर काफी सारे शब्द और वाक्य बोलने लगा है| कई गलतियाँ कर दी, चीजे तोड़ दी और हलकी सी डांट भी खा ली, ये एक नियमित काम हो गया| लेकिन इस डांट ने उसे समझदार बना दिया है काफी| अब भी शैतानी करता है लेकिन सब कुछ पूछ के|

ट्राईसाइकिल एक दादा ने दी थी उसे तोड़ दिया| एक और लाकर दिया| अब उसे पता है की साइकिल क्यों टूटी? इसलिए अब साइकिल को सीधे दीवार से ले जाकर टकराता नहीं है| पहले पूछता है की पापा टक्कर मार दूँ? मैं मना कर देता हूँ तो फिर पूछता है-टक्कर मार दूँ?, फिर मना करता हूँ, फिर पूछता है, फिर मना करता हूँ तो साइकिल को ले जाकर सीधे दीवार में टक्कर मार देता है| सही भी है, ३ बार आज्ञा मांगी और फिर भी नहीं मिली तो मन की करेगा ही न| जिस तरीके से ये अपनी ही साइकिल पर बैठकर दीवार में टक्कर मारता है उससे तो लगता है की पिछले जन्म में ये वही था जिसने वर्ल्ड ट्रेड टॉवर में हवाई जहाज दे मारा था| ये तो साइकिल की बात थी जो कई बार टक्कर मरने पर टूटती है| मेरा सपूत अक्सर ऐसी आज्ञा कप गिलास वगैरह के बारे में भी मांगता रहता है|

करीब दर्जन भर शहीद हुए कप के बाद एक दिन चांटा भी पड़ा| और चांटे का असर देखिये की अब भी पूछता है की कप तोड़ दूँ, और मेरे ३ बार मना करने पर नहीं तोड़ता| बल्कि तब तक पूछता रहता है जब तक की आप परेशान होकर ये न कह दे की ‘तोड़ दे कप मेरे बाप, पर चुप हो जा’|

लेकिन आधुनिक युग का बच्चा है, सिर्फ आज्ञा मानेगा थोड़ी, आज्ञा देता भी है| पापा टीवी बंद मत करो, पापा गाना लगा दो, पापा दादा फ़ोन करा दो, पापा कार मत जाओ ट्रेन (मेट्रो) से जाओ| किसी छुट्टी के दिन जब शैतानी कर रहा होता है और डांट पड़ती है मुझे फिर आज्ञा देता है – पापा ऑफिस जाओ|  सन्डे को ऑफिस?? मुझे लगता है की अगर मैं इसे ऐसे ही शैतानी करने पर डांटता रहा तो ये मेरे बॉस को फ़ोन करके बोला करेगा की अरे इन्हें टूर पे क्यों नहीं भेजते, क्या मेरे सर पर बिठा रखा है इन्हें?

मैं भी इंतेज़ार कर रहा हूँ की थोडा सा और बड़ा हो फिर बताता हूँ की हुक्म कैसे दिए जाते है|

 

मेरा आज्ञाकारी बेटा

Post navigation


4 thoughts on “मेरा आज्ञाकारी बेटा

  1. Naveen sir …. its beautifully written , jab woh bara ho jayega tab aap uski aisi baatein miss b karoge ….. i m just waiting for the time when he will read this blogs and say papa ….mei itna shararti tha yeah mujhe yeah par k pata laga…and aapke expressions kya honge ..bete yeah baat…..bless the moments…

  2. शिकायत न करो प्यार्र मेरे प्यारे पोते का. जरा तफ्तीश करो खुद के इतिहास का तो आदित्य शराफत का पुतला निकलेगा. वैसे बचपन में मुझे भी तोड-फोड का शौक था. मेरे बडे भैया ने मुझे एक हथौडा दिया और कोयले के बडे-बडे ढेले दिये और कहा लो तसल्ली से पूरी कर लो अपनी अभिलाषा!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *